भारत को अतीत जीवी बनाने में इसकी गुलामी का बहुत बड़ा हाथ है l गुलामी से जो हीन भावना आई l भारत ने उससे निकलने के लिए अपने अतीत में महान होने के नशे में डूब जाने का रास्ता चुना l

धार्मिक और सामाजिक कथित पाखंड जातिवाद, धर्मवाद, सामाजिक मुद्दों वर्चस्व के अहंकार में आज भी फंसा हुआ है। आज़ादी के बाद भारत को अतीत की महानता के इस नशे से निकालने के लिए ज़ोरदार कोशिश करी जानी चाहिए थी l

लेकिन आज यह देखा जा रहा है फला इस जाती का है शिक्षा और रोजगार में आये दिन जातिवाद के कथित सबूत सामने है। यहां तक देश शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में भी जातिवाद की घटनाये नजर आती है।

लेकिन जनसंघ जो बाद में भाजपा बनी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारत के धर्म गुरुओं ने एक योजना के तहत भारतीयों के दिमागों में इस नशे को और गहरा किया l

आज भी भारत राम-रावण के युग में जी रहा है l

भारत आज की बेरोजगारी, शिक्षा की बदहाली और दंगा प्रधान राजनीति के प्रति ध्यान देने की हालत में है ही नहीं l रही सही कसर टीवी के सीरियलों ने पूरी कर दी जिनमें मिथ्या को इतिहास की तरह दिखाया जाता है l

आज भी भारत का युवा हनुमान के उड़ने राम के भगवान होने और सारे चमत्कारों की कहानियों पर ना सिर्फ यकीन करता है बल्कि उसे अपने महान होने के सबूत के तौर पर बहस भी करता है l

जब तक आंखें खोल कर अपनी बदहाली को नहीं समझेगा और इसे बदलने के लिए अपने महान होने का झूठा भ्रम नहीं त्यागेगा, भारत इसी भूख, बीमारी, दंगे फसाद और जातिगत नफरत के कीचड़ में लिथड़ता रहेगा l

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