त्रिपुरा शहरी निकाय चुनाव के लिए प्रचार अभियान मंगलवार दोपहर 4 बजे समाप्त होने से कुछ घंटे पहले भाजपा नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुदीप रॉय बर्मन ने मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब और राज्य भाजपा नेतृत्व के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में “लोकतंत्र का कोई निशान नहीं है।”

रॉय बर्मन, जो बिप्लब देब कैबिनेट में मंत्री रहे, लेकिन एक साल बाद किसी अस्पष्ट वजह से हटा दिए गए, ने कहा, “कानून और व्यवस्था गृह मंत्री की जिम्मेदारी है। हो सकता है कि वह डेटा एकत्र कर रहे हों, लेकिन उसे जनता के सामने रखा जाना चाहिए। गृह मंत्री की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया कि गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वह अपने बारे में क्या सोचते हैं? मैं कहता हूं कि उनके दिन अब गिने-चुने रह गए हैं।”

देब का नाम लिए बिना, रॉय बर्मन, जिन्होंने पहले देब के खिलाफ कई टिप्पणियां की थीं, ने कहा कि एक निश्चित “पैराशूटेड पैराट्रॉपर लीडर” को त्रिपुरा भेजा गया था, जिसे राज्य के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “हमने इतने सालों में पैराशूट से लैस पैराट्रूपर नेता को त्रिपुरा में वामपंथियों से लड़ते नहीं देखा।”

यह दावा करते हुए कि त्रिपुरा में गुंडों और आम लोगों के बीच एक “अघोषित युद्ध” चल रहा है, उन्होंने लोगों से हिंसा का विरोध करने और मतदान के दिन डर की परवाह किए बिना उत्सव के मूड में वोट डालने की अपील की।

उन्होंने अगरतला नगर निगम (एएमसी) के सभी क्लबों से अपील की कि वे अपने इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और बाहरी लोगों को मतदान प्रक्रिया से पहले या उसके दौरान वहां न रहने दें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका कोई “व्यक्तिगत झगड़ा” नहीं है, लेकिन दावा किया कि “कुछ गतिविधियां” पार्टी और नेतृत्व के नाम को बर्बाद कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने 21 नवंबर को भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा, राष्ट्रीय महासचिव बी एल संतोष और असम के मुख्यमंत्री और एनईडीए के अध्यक्ष हिमंत बिस्वा सरमा से बात की।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधायक आशीष कुमार साहा के साथ बैठे भाजपा विधायक यह भी कहा कि “पैराट्रूप से लैसे नेता” और कुछ अन्य लोगों के “बचकाना नेतृत्व” ने भाजपा के “मुख्य राजनीतिक दुश्मन” की पहचान करने में गलती कर दी है।

निकाय चुनाव से पहले त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भाजपा के दोनों बागी विधायकों ने मंगलवार को आरोप लगाया कि राज्य में हालिया राजनीतिक हिंसा ने पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है, जिससे पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की चुनावी संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

विधायकों सुदीप रॉय बर्मन और आशीष साहा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश की शीर्ष अदालत, त्रिपुरा उच्च न्यायालय और यहां तक ​​कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी निकाय चुनाव से पहले हालिया राजनीतिक हिंसा में हस्तक्षेप करना पड़ा।

पश्चिम बंगाल के एक तृणमूल कांग्रेस नेता को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में सोमवार को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अज्ञात हमलावरों ने कथित तौर पर मारपीट की थी।

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