भारतीय महिला हॉकी टीम ने इस साल 23 जुलाई से 8 अगस्त तक चले टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। वह पोडियम तक तो नहीं पहुंच पाई, लेकिन अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए वह चौथे स्थान पर रही। 2016 रियो ओलंपिक में अंतिम स्थान पर रहने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए यह उल्लेखनीय बदलाव है।

इस परिवर्तन का श्रेय निश्चित रूप से भारतीय महिला हॉकी टीम के पूर्व कोच डेनमार्क के शोर्ड मारिन को जाता है। हालांकि, मारिन अब भी अपने वेतन और नकद प्रोत्साहन की अंतिम किस्त की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

खास यह है कि उनकी प्रतीक्षा का कारण स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की ओर से दिया गया लैपटॉप और लालफीताशाही नौकरशाही। टोक्यो ओलंपिक के बाद खिलाड़ियों के साथ-साथ कोचिंग स्टाफ को भी नकद पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि देने का वादा किया गया था, लेकिन ओलंपिक के बाद मारिन का कार्यकाल समाप्त हो गया और कुछ दिन के बाद वह स्वदेश लौट गए थे।

द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, मारिन ने बताया कि उन्हें अब तक भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) से अपना ‘अंतिम वेतन’ और यूपी सरकार द्वारा घोषित 25 लाख रुपये का इनाम नहीं मिला है। उन्होंने बताया, ‘मुझे अब तक यूपी सरकार से पुरस्कार राशि और साई के पास लंबित बकाया राशि नहीं मिली है। हालांकि, मैं उनके साथ लगातार संपर्क में हूं। मुझे विश्वास है कि जल्द ही यह सुलझ जाएगा।’

साई ने एक बयान में कहा, ‘वेतन पहले से ही प्रक्रिया में है। महिला टीम के मुख्य कोच के रूप में शोर्ड मारिन को जो ‘आधिकारिक संपत्ति’ दी गई है, उनके द्वारा SAI को सौंपने के बाद दी जाएगी। यह ‘फुल एंड फाइनल’ के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।’

साई ने यह भी कहा, ‘अनुबंध के अनुसार, हम विश्व कप समेत प्रमुख टूर्नामेंट्स में कोच के योगदान को ‘मान्यता’ देंगे। लेकिन प्रदर्शन बोनस अनुबंध का हिस्सा नहीं था। भारतीय महिला हॉकी टीम वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंची थी। एशियाई खेलों में उसने रजत पदक जीता था। वहीं, टोक्यो ओलंपिक में वह चौथे स्थान पर रही।’

टोक्यो में भारतीय महिला हॉकी टीम ने क्वार्टर फाइनल में अपने से ऊंची रैंक वाली और पूर्व ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराया था। स्वदेश लौटने पर, भारतीय महिला हॉकी टीम को उत्तर प्रदेश (यूपी) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मानित किया। हर खिलाड़ी के लिए 50 लाख रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की। कोच मारिन 25 लाख रुपये पाने के हकदार थे, जबकि सहयोगी स्टाफ को 10 लाख रुपये मिले।

19 अगस्त को लखनऊ में हुए भव्य समारोह में मौजूद खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के कुछ सदस्यों को तत्काल पुरस्कार मिला। हालांकि, मारिन इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि वह डच क्लब टिलबर्ग के साथ अपने अगले असाइनमेंट पर चले गए थे।

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