आगरा पुलिस की हिरासत में मरने वाले अरुण के शरीर पर चोट के चार निशान मिले हैं। दोनों पैरों पर खरोच है। थाना जगदीशपुरा में चोरी के मामले में पकड़े गए अरुण कुमार की हिरासत में मौत के मामले के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

मां कमला देवी का कहना है कि पुलिस वालों ने चोरी का आरोप लगाते हुए पूरे परिवार को उठा लिया और उनकी पिटाई लगाई। अरुण कुछ पुलिस वालों के नाम बता रहा था। नाम उजागर न हो जाएं, इसलिए उसे मार दिया। मुझे इंसाफ चाहिए जिसने उसे मारा है उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

पत्नी ने लगाए पुलिस पर आरोप

मृतक की पत्नी सोनम ने भी कहा है कि पुलिस ने उसकी पिटाई लगाई। उनसे पैसा लाने को दबाव बना रहे थे। महिला पुलिस कर्मियों के साथ पुरुष पुलिस कर्मियों ने भी पिटाई लगाई। पोस्टमार्टम हाउस पर मृतक के परिजन एकत्रित हुए और वहां पुलिस पर आरोप लगाए। 

देश में दलित आदिवासियों की हत्या जिनके प्रति राष्ट्रीय स्तर फैला रहा रोष

राजस्थान में डंगावास में दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा (2015), रोहित वेमुला (2016), तमिलनाडु में 17 साल की दलित लड़की का गैंगरेप और हत्या (2016), तेज़ म्यूज़िक के चलते सहारनपुर हिंसा (2017), भीमा कोरेगांव (2018) और डॉक्टर पायल तड़वी की आत्महत्या (2019), इन मामलों की पूरे देश में चर्चा हुई लेकिन सिलसिला फिर भी रुका नहीं।

उत्तरा प्रदेश में मुआवजा और नौकरी देने में भेद- भाव

  •  लखीमपुर खीरी कांड : 24 घंटे के अंदर ही सरकार  ने 4 मृतकों के परिवार वालों को 45-45 लाख और नौकरी देने का वादा किया 48 घंटे में मुवावजा घर तक पहुंच गया।
  • हाथरस बलात्कार और शव को जलाने का मामला : हाथरस गैंगरेप पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री से आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की। तब योगी सरकार ने मुआवजा 10 लाख से बढ़ा के 25 लाख कर दिया है जबकि परिवार अत्यंत गरीब है।
  •  गोरखपुर का मनीष गुप्ता हत्याकांड : पीड़ित परिवार को 40 लाख रुपए की आर्थिक सहायता व पत्नी मीनाक्षी को कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) में OSD पद पर सरकारी नौकरी।
  • कमलेश तिवारी का मर्डर केस : सरकार ने कमलेश तिवारी के परिवार को 15 लाख रुपए नकद और सीतापुर में एक मकान देने की घोषणा की।
  • सोनभद्र में 11 बच्चों का नरसंहार : मृतकों के परिवार को साढ़े 18 लाख रुपए और घायलों के परिजनों को ढाई लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की।
  •  विवेक तिवारी हत्याकांड :महज 4 दिन के अंदर ही सरकार ने पीड़ित परिवार को 40 लाख रुपए मुआवजा दिया। इसके साथ ही प्रदेश सरकार की ओर से मृतक विवेक की पत्नी को लखनऊ निगम में B क्लास की सरकारी नौकरी

दलित आदिवासियों की मौत पर मुआवजे की राशि इतनी कम क्यों

अगर हम तो हाल के एक जैसे ही मामले लेकर देखे तो ‘सफाईकर्मी’ अरुण वाल्मीकि की हिरासत में मौत, पीड़ित परिवार को 10 लाख देगी सरकार जबकि ‘कारोबारी’ मनीष गुप्ता की पुलिस चेकिंग के दौरान मौत, पीड़ित परिवार को 40 लाख के साथ पत्नी को OSD पद पर सरकारी नौकरी।

दो जान, दो कीमत, गरीब को 10 लाख, मध्यम वर्ग को 40 लाख और सवर्ण अमीर को 1 करोड़ दोनों घटना अभी हाल की है। इतना ही नहीं गुप्ता बीजेपी सपोर्टर, दूसरा वाल्मीकि, नाम देखकर मुआवजा, और कहीं मुस्लिम होता तो न मुआवजा न कुछ , उल्टा कोई न कोई केस उस पर दिखा दिया जाता।


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