रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सावरकर पर एक किताब का विमोचन करते हुए इस मुद्दे पर विस्तार से बात की है। एक तरफ सावरकर के विरोधियों पर जमकर निशाना साधा गया तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें देश का सबसे बड़ा कथित राष्ट्रवादी करार दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि जेल में बंद सावरकर ने महात्मा गांधी के कहने पर ही अंग्रेजों को दया याचिका लिखी थी।

जिसके बाद सोशल मीडिया पर जमकर प्रतक्रिया लोगो ने देना शुरू कर दिया। कुछ लोगो का कहना है वह कैसा वीर है जो दूसरे के कहने पर आत्म सम्मान खो कर माफ़ी मांगने लगा।

@ShyamMeeraSingh यूजर ने लिखा सावरकर ने अपनी पहली माफ़ी 30 अगस्त 1911 के दिन लिखी, दूसरी 1913 में, उसके बाद 1917 में लिखी, इसके बाद भी तब तक लिखते रहे जब तक कि 1924 में जेल से रिलीज़ नहीं हो गए। जबकि गांधी अफ़्रीका में थे और 9 जनवरी 1915 को भारत आए थे। गांधी से पहले ही सावरकर ने दो बार माफ़ी माँगी ली थी।

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