नई दिल्ली : दिल्ली के उर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने कोयले की कमी और बिजली संकट को लेकर कहा है कि मुश्किल स्थिति है और अगर केंद्र ने मामला ना संभाला तो परेशानी खड़ी हो सकती है। जैन ने दिल्ली में ब्लैक आउट की आशंका से भी इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ब्लैक आउट इस पर निर्भर है कि केंद्र सरकार बिजली देंगी या नहीं। जबतक बिजली देते रहेंगे ब्लैकआउट नहीं होगा। अगर सप्लाई रुकी तो ब्लैक आउट होगा।

जैन ने कहा, केंद्र की ओर से दिल्ली को अभी आधी बिजली मिल रही है। हम महंगी बिजली खरीदकर लोगों को दे रहे हैं। केंद्र ने देश के सभी प्लांट का उत्पादन एकसाथ आधा कर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोई कोयला बिजली संयंत्र नहीं है। हम दूसरे राज्यों में स्थित कोयला संयंत्रों से बिजली खरीदते हैं। एनटीपीसी ने अपने सभी संयंत्रों की उत्पादन क्षमता को आधा कर दिया है। दिल्ली को आधी ही बिजली मिल रही है। इसके दो कारण हो सकते हैं, या तो कोयले की कमी है या फिर केंद्र ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा है।

सत्येंद्र जैन ने केंद्र से बिजली मुद्दे को जल्दी सुलझाने की अपील करते हुए कहा कि एनटीपीसी से दिल्ली को करीब चार हजार मेगावाट बिजली मिलती थी, लेकिन अभी उससे आधी बिजली भी नहीं मिल पा रही है। यह चिंता की बात है। पूरे देश में बिजली का संकट है।

केंद्र के दावों पर सवाल उठाते हुए जैन ने कहा कि अगर बिजली का संकट नहीं है तो पूरे देश में बिजली के कट क्यों लग रहे हैं। अगर केंद्र सरकार कह रही है कि बिजली का संकट नहीं है तो देश के अलग-अलग मुख्यमंत्री इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री को चिट्ठी क्यों लिख रहे हैं।

केंद्र में लगातार चल रही बैठकें

कोयला संकट के कारण बिजली आपूर्ति में कमी को लेकर केंद्र के अलग-अलग मंत्रालयों में भी बैठकें चल रही हैं। आद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) बिजली संकट की आशंकाओं पर एक समीक्षा बैठक आयोजित कर रहा है। सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह ने इसको लेकर बिजली मंत्री आरके सिंह, कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ कोयला और बिजली मंत्रालयों के प्रभारी के साथ बैठक की थी।

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