वाराणसी के सर सुंदरलाल अस्पताल में ठीकठाक फर्श को बिना उखाड़े ही, उसी के ऊपर नए पत्थर बिठाए जा रहे हैं। ठेकेदारों के मनमाफिक अस्पताल प्रशासन खुलकर धन का दुरुपयोग कर रहा है।

अस्पताल के ही एक कार्डियोलॉजिस्ट प्रो. ओमशंकर ने अस्पताल प्रशासन ने यह आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर में बिना किसी जरूरत के तोड़-फोड़ मचाई जा रही है और कायाकल्प के नाम पर लोगों की आंख में धूल झाेंका जा रहा है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल में बीते 1 महीने से कायाकल्प योजना के तहत रिपेयरिंग और सजावट का काम चल रहा है। करोड़ों रुपए के इस प्रोजेक्ट में केवल अधिकारियों और ठीकेदारों ने अपनी जेबे गर्म की हैं।

प्रो. ओमशंकर ने बताया कि मजबूत दीवार को गिराकर अनावश्यक खंभे बनवाए जा रहे हैं। इससे लोगों को खासा दिक्कत हो रही है। कायाकल्प के नाम पर अस्पताल को नया रूप देने का लॉलीपॉप दिखाया जा रहा है।

मरीजों की सुविधा का कायाकल्प कब होगा

प्रो. ओमशंकर ने अस्पताल प्रशासन से यह सवाल पूछा कि आखिर मरीजाें की सुविधाओं का कायाकल्प होगा। आपका कायाकल्प तो रोगी को मिलने वाली सुविधाओं को बेहतर करने के बजाय BHU के अधिकारियों और अपने घरों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। 43 लाख रुपए से IMS डायरेक्टर के घर में रिपेयरिंग और फिनिशिंग का काम हुआ।

स्ट्रेचर नहीं और जांच की असुविधा पर कोई खर्च नहीं

मरीजों के लिए स्ट्रेचर, जांच की असुविधा, CT स्कैन सेंटर, MRI मशीन, PET स्कैन, जांच की रिपोर्ट्स में देरी आदि के कारण सर सुंदरलाल अस्पताल में मरीज का सही देखभाल नहीं हो पाता है। ऑटोमेटिक टेस्टिंग टूल्स, “वन स्टॉप” जांच केंद्र का भवन बनाया जाए।

इनको 24 घंटे चलाया जाए। नए स्टाफों की बहाली हो। नए इमेरजेंसी भवन का निर्माण और बच्चों के लिए अलग से 100 बेड के इमरजेंसी तैयार कराया जाए। यदि इसमें कायाकल्प का पैसा लगता तो सचमुच मरीजों की बदहाली खत्म हो जाती।

आवश्यक सुविधाएं बढ़ाने के बदले, सरकारी धन की लूट मची हुई है। वहीं मरीजों की सुविधा बढ़ाने के लिए प्रयास करते तो अधिकारियों को भी इसका फायदा जरूर मिलता।

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