दिल्ली एम्स में सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के प्रोफेसर डॉ. संजय राय ने कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा किए गए सीरोसर्वे के अनुसार देश के लगभग 60% बच्चे कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। लेकिन बच्चों में मृत्यु दर 1 लाख में 2 है, जो कि बहुत कम है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई अध्ययन नहीं है जो यह साबित करे कि टीका बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होगा।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सिन की सुरक्षा और प्रतिरक्षण क्षमता बच्चों में लगभग 18 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों की तरह ही है। डॉक्टर राय ने कहा कि कोवैक्सिन का ट्रायल तीन आयु समूहों पर किया गया था।

पहला समूह 12-18 साल के बच्चों का, दूसरा समूह 6-12 साल के बच्चों का और तीसरा समूह 2-6 साल के बच्चों का था। बता दें की राय बच्चों पर कोवैक्सिन परीक्षणों के प्रमुख इन्वेस्टिगेटर (अन्वेषक) थे। डॉक्टर ने कहा कि पहले हमने 12-18 साल के बच्चों पर परीक्षण किया और इसके बाद अन्य आयु वर्ग के लोगों पर परीक्षण किया।

बच्चों पर कोवैक्सिन की सुरक्षा और प्रतिरक्षण क्षमता बिल्कुल वयस्कों के समान है। हालांकि हमें ट्रायल के अंतिम परिणामों का इंतजार है। हमने वयस्कों पर पहले की इसका ट्रायल कर लिया है। बच्चों पर किए गए ट्रायल का हमें इंतजार है। राय ने कहा कि वैश्विक स्तर पर देखा गआ है कि SARS-CoV-2 बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक नहीं है। उन्होंने कहा कि बच्चों में इसका संक्रमण बहुत कम होता है।

उन्होंने कहा कि वैक्सीन फिर चाहे वो जॉयडस कैडिला हो, भारत बायोटेक हो या फिर फाइजर हो किसी के बारे में यह नहीं कहा जा सकता कि कौन सी ज्यादा असरकारक है और कौनसी कम। ये वैक्सीन संक्रमण की गंभीरता को तो कम करती हैं मगर संक्रमण को नहीं। डॉ. राय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस महीने की शुरुआत में एम्स प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया ने 12-18 साल के बच्चों को जल्द वैक्सीन लगाने की बात कही थी।

वहीं, अगर भारत में कोरोना वायरस वैक्सीनेशन की बात करें तो सोमवार को शाम 7 बते तक वैक्सीन की 59 लाख डोज देने के साथ देश में अब तक 95.82 करोड़ डोज दी जा चुकी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी।

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