मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय में एक करोड़ रुपये के गबन के मामले में सीबीआई की टीम ने एक बार फिर से बुधवार को रेलकर्मियों से पूछताछ की। सीबीआई टीम के  एक बार फिर से डीआरएम ऑफिस पहुंचने से हड़कंप मच गया। इस दौरान सीबीआई के अफसर काफी देर तक लेखा विभाग में मौजूद रहे।

  • इस दौरान सीनियर डीपीओ राजेश शर्मा पर भ्रष्टाचार फैलाने की हो रही है चर्चा,ऑडियो हो रहा है वायरल –
  • जो देते हैं 5 हजार उनकी पोस्टिंग होती है प्रयागराज- कानपुर, जो पैसा देने में समर्थ नहीं है, उनकी पोस्टिंग होती है टूंडला।
  • बना रखी है ऐसी व्यवस्था कि लोगों को लगे कि होता है ईमानदारी से काम लेकिन भ्रष्टाचार में डूबे पर्सनल डिपार्टमेंट की व्यवस्था है धड़ाम ।
  • पर्सनल डिपार्टमेंट के गुर्गे गोवर्धन, गुलाब सिंह, मोहम्मद इरफान जैसे तमाम लोग करते हैं वसूली,कई वर्षों से है एक ही जगह हैं ये जमे, लोगों में बना चर्चा का विषय ।
  • तमाम लोगों ने दे रखा है ट्रांसफर हेतु अपना लेटर, पैसा देने के बावजूद भी नहीं निकाले जा रहे हैं आदेश । सीनियर डीपीओ की नाक के नीचे संरक्षण मे फैला भ्रष्टाचार ।
  • इसी तरह विभागीय परीक्षा गार्ड, जीडीसीई मे गुपचुप तरीके से हो रहे हैं सौदेबाजी । वसूली हेतु दलालों का फैला है मकड़जाल ।
  • बिजलेंस विभाग की मिलीभगत से हो रहा है खेल, यह विभाग भ्रष्टाचारियों को पकड़ने में है फेल । इन सभी मामलों में तो होनी चाहिए सीबीआई से जांच ।

प्रयागराज । एनसीआर के मण्डल रेल प्रबंधक कार्यालय इलाहाबाद में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है । मीडिया में कई बार भ्रष्टाचार की खबरों को उजागर करने के बावजूद भी रेलवे के उच्च अधिकारी आंख मूंद कर बैठे हैं और भ्रष्टाचार दिन दूना रात चौगुना फल फूल रहा है ।

पर्सनल डिपार्टमेंट में वसूली और नौकरियों की परीक्षाओं में पास कराने का धंधा धड़ल्ले से अवैध तरीके से चल रहा है , इस धंधे को रोकने मे रेलवे की विजिलेंस विभाग पूरी तरह फेल है क्योंकि यह धंधा एक नये तरीके से योजना बनाकर कराई गई है इसमे बाहरी व्यक्तियों के माध्यम से कराया जा रहा है और सीनियर डीपीओ ने इस मामले मे अपनी फौज लगा रखी है। जिसमें वेलफेयर इंस्पेक्टर भी शामिल हैं ।

यह डब्ल्यूएलआई जांच के नाम पर उम्मीदवारों को सेट करते हैं और रेलवे से यात्रा भत्ता लेते हैं । जांच में भ्रष्टाचार सही पाए जाने के बाद भी उन पर कोई कार्यवाही नहीं करते एवं जांच को दबाए रखने एवं धन उगाही का यह काम करते हैं ।

बता दें कि यह वेलफेयर इंस्पेक्टर लोग कर्मचारी के हितों का कोई कार्य नहीं करते हैं ,बल्कि उनसे दलाली का काम करते हैं । यदि सहायक लोको पायलट और गार्ड तथा अन्य हुई विभागीय परीक्षा की जांच हुई तो उसमे जमकर अवैध वसूली हुई है।

देखा जाए तो वर्तमान में अभी यह चल रहा है, इसमें करोड़ों रुपए वसूले गए हैं। यदि देखा जाए तो सारे लोको पायलट की परीक्षा के बाद पोस्टिंग लगभग 5 हजार रूपये के हिसाब से अवैध वसूली हुई है। यह चर्चा खुलेआम कर्मचारियों में सुनने को मिल रहा है और ट्रेनों पर तथा सार्वजनिक स्थानों पर उम्मीदवार कर रहे हैं।

तमाम कर्मचारियों ने अपने मंडल एवं जोन स्तर पर स्थानांतरण हेतु प्रार्थना पत्र दिए हैं जिन पर स्वीकृति तो हो गई है लेकिन पैसा वसूलने के बाद भी उनका स्पेर लेटर आज तक जारी नही किया गया है ।

यह सारा खेल पर्सनल डिपार्टमेंट राजेश कुमार शर्मा के सचिवालय से मोतीलाल मिश्रा एंड कंपनी के माध्यम से चल रहा है । इतना ही नहीं कंप्यूटर रिपेयरिंग, प्रिंटर , फ्लिप जैसे समानों की लंबी लंबी खरीददारी भी इसी सचिवालय को दी गई है ।

सही बात तो यह है कि लंबे समय से मोतीलाल मिश्रा जैसे कई लोग कुंडली मारकर वर्षों से एक ही जगह मलाईदार सीट पर बैठे हुए हैं जो भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं । इनकी वजह से दूसरे अच्छे- ईमानदार लोगों को कार्य करने का मौका नहीं मिल पा रहा है ।

रेलवे गाइडलाइन के मुताबिक एक ही जगह वर्षों से जमे लोगों का ट्रांसफर नहीं हो रहा है क्योंकि भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारी इनको संरक्षण दिए हुए हैं । यदि जांच हुई तो सीनियर डीपीओ एवं इनके रैकेट में शामिल इन तमाम लोगों की करोड़ों की अवैध कमाई का धन एवं आय से अधिक बेनामी संपत्ति निकलेगी । इसकी जांच विजिलेंस विभाग तो इमानदारी से नहीं कर रहा है इसलिए सीबीआई के माध्यम से होनी चाहिए ताकि भ्रष्टाचारियों का पर्दाफाश एवं इन पर कार्रवाई हो सके ।

वर्तमान सीनियर डीपीओ राजेश कुमार शर्मा की पकड़ पुलिस प्रशासन एवं राजनीतिक गलियारों व सत्तारूढ़ पार्टी में गहरी पैठ होने की वजह से इस पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है । जो खुलेआम विभाग में भौकाल बना कर रखा है और यह चैलेंज करता है कि इसका कोई कुछ नहीं कर सकता है ।

इस पर महिला कर्मचारी रिसिका सिंह के द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगाए गए हैं जो मामला सुर्खियों में रहा है और अब तक इस मामले में इन पर कोई जांच कमेटी नहीं बनी है और ना ही रिसिका सिंह के बारे में हुई जांच पर कोई कार्रवाई की गई है ।

इस मामले में जीएम आफिस से पत्र संख्या 2020 -ई/जी.एम/ एसएसबी /इला./ 163 दिनांक 9-10 फरवरी 2021 मे रिसिका सिंह के पत्र पर डिप्टी सीपीओ एच0एन चौधरी ने भी इस जांच में चुप्पी साध रखे हैं जिसकी पुनः जांच होना आवश्यक है ।

रिसिका सिंह के 27-28 जनवरी 2021 के पत्र मे यौन उत्पीड़न पर आंतरिक जांच समिति की पक्षपात पूर्ण रिपोर्ट के विरुद्ध उच्च स्तरीय जांच कराने के संबंध में पत्र अधिकारियों को मिला है । जिसमें रिसिका सिंह ने आरोप लगाए हैं कि सीनियर डीपीओ राजेश कुमार शर्मा ने अपने ऑफिस में मुझसे पक्ष मे एक पत्र लिखवाने के बाद संतुष्ट न होने पर दूसरा पत्र जबरन लिखवाया है जिसके गवाह एस0ए खान पूर्व एपीओ रहे हैं ।

इस मामले में आज तक सीनियर डीपीओ राजेश शर्मा पर कोई भी जांच कमेटी नहीं बैठाई गई है आखिर क्यों यह एक बड़ा सवाल है । यदि इस भौकाली भ्रष्टाचार में लिप्त सीनियर डीपीओ को हटाया नहीं गया तो आने वाले समय में रेलवे के नियम कानून धरे रह जाएंगे और पारदर्शिता का नामो निशान मिट जाएगा ।

सीनियर डीपीओ के मामले में तमाम कर्मचारियों के बीच हो रही बात का ऑडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें सीनियर डीपीओ द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार की चर्चा रात दिन हो रही है ।

डब्लूएलआई और पर्सनल डिपार्टमेंट के कर्मचारियों में यह चर्चा खुलेआम हो रही है की सीनियर डीपीओ काले अंग्रेज हैं ,इतना ही नही अब तो उच्च अधिकारियों के बारे में भी लोग टिप्पणी करने से बाज नहीं आ रहे हैं । अब देखना यह है कि कौशांबी वॉइस की खबरों का संज्ञान लेकर उच्च अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों की जांच कराएंगे ,रेलवे गाइडलाइन का पालन कराएंगे या फिर सब कुछ फाइलों में दबकर रह जाएगा यह जांच का विषय है ।

रिपोर्ट : अमरनाथ झा

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