मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी तीन विधानसभा सीटों और एक संसदीय सीट पर आदिवासी वोटों पर नजर रखते हुए मंगलवार को दो बड़ी घोषणाएं कीं। आदिवासियों को महुआ से बनी शराब बेचने और उपभोग करने के लिए लाइसेंस देने के लिए शराब नीति में संशोधन करने और आदिवासियों के खिलाफ छोटे-छोटे मामलों को वापस लेने की घोषणा किया है।

सीएम ने उपरोक्त घोषणाएं पड़ोसी अलीराजपुर जिले के झाबुआ में आयोजित ‘जनजातीय सम्मेलन’ के दौरान की, जहां 30 अक्टूबर को जोबट विधानसभा सीट (अनुसूचित जनजाति) पर उपचुनाव होने हैं। रायगांव और प्रथवी पुर में भी उपचुनाव है।

वंही उन्होंने अनुसूचित जाति को लॉलीपॉप दिया गौर तलब है शिवराज की सरकार में आदिवासी और दलितों के प्रति कथति पराध के मामले में बढ़ोत्तरी हुयी है। हाल में कई ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए जो सरकार पर कई सवाल खड़े करते है वंही उपचुनाव से पहले सरकार का अब आदिवासी प्रेम दिखाना चाह रही है।

उन्होंने युवाओं को लुभाने के लिए कहा मेधावी जनजातीय बेटे-बेटियों मैं तुमसे कहने आया हूं कि मन लगाकर पढ़ना, तुम्हारा एडमिशन मेडिकल, इंजीनियरिंग जैसे कॉलेजों में होगा, तो तुम्हारी फीस तुम्हारा मामा शिवराज भरवायेगा।

इसके साथ उन्होंने कहा मेरे गरीब और जनजातीय भाई-बहनों, जिनका परिवार बहुत बड़ा हो गया और घर में रहने का स्थान नहीं है, ऐसे परिवारों को पट्टा देकर भूखण्ड का मालिक बनाया जायेगा। नई रेत नीति बनाकर प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को बालू नि:शुल्क उपलब्ध करायेंगे, ताकि गरीब भी अपना मकान सरलता से बना सके।

इसके साथ ही मध्यप्रदेश में महुए की शराब बना कर जनजातीय भाई-बहन बेच सकेंगे। परंपरागत शराब बनाने और बेचने वालों पर मुकदमा कायम नहीं होगा। प्रदेश सरकार नई आबकारी नीति बनायेगी और जनजातियों पर दर्ज सभी छोटे मुक़दमे वापस लिये जायेंगे।

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