दो साल पहले तरनतारन में हुये धमाके के आरोपी मलकीत सिंह शेरा की मंगलवार को गुरु नानक देव अस्पताल में मौत हो गई। शूगर की बीमारी से पीड़ित शेरा की मौत मल्टी बाडी पार्ट फेलियर के चलते हुई।

5 सितंबर 2019 को तरनतारन में हुए धमाके में नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) जांच कर रही है।

अमृतसर की केंद्रीय जेल में बंद शेरा की तबीयत खराब होने पर उसे गुरु नानक देव अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। पुलिस ने शेरा का पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। 5 सितंबर 2019 को अमृतसर से करीब 22 किलोमीटर दूर तरनतारन में हुए धमाके में दो लोगों की मौत हो गई थी।

एनआईए के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में शेरा ने कहा था कि उसका मकसद श्री गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी का बदला लेने के लिये सुखबीर सिंह बादल को मारने की योजना थी। एनआईए के मुताबिक धमाके की योजना बनाने वाला सरगना बिक्रम सिंह पंजवड़ है।

योजना के अनुसार स्वर्ण मंदिर के प्रवेश द्वार पर सुखबीर बादल पर बम फेंका जाना था। लेकिन, सुखबीर बादल की सुरक्षा के चलते योजना असफल हो गई। बाद में बम को स्टील के डिब्बे में रख कर जमीन में छुपा दिया गया था।

वहीं दूसरी तरफ शेरा के भाई रविंदरजीत सिंह ने बताया कि उसके भाई पर खालिस्तान की फंडिंग और तरनतारन में बम धमाके का आरोप था। बम धमाके की जांच एनआईए कर रही थी। उसके भाई को शूगर और दिल की बीमारी थी।

उन्हें निजी इलाज की इजाजत नहीं दी गई। शेरा को कोरोना भी हुआ था। उन्होंने अपनी भाई की मौत के लिए जेल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर शेरा का सही तरीके से इलाज करवाया जाता, तो उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने बताया कि 4 अक्तूबर को उसके भाई की एनआईए मोहाली कोर्ट में पेशी थी और जेल प्रबंधन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेशी करवाई थी।

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