गोरखपुर में कानपुर के व्यवसायी मनीष गुप्ता की हत्या के मामले की न अब तक सीबीआइ जांच शुरू हो सकी है और न ही पुलिस अब तक आरोपित पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार ही कर सकी है।

आरोपित पुलिसकर्मियों तक पहुंचने के लिए अब एसटीएफ को भी जुटाया गया है। वहीं कानपुर में गठित एसआइटी फरार आरोपितों के विरुद्ध एनबीडब्ल्यू (गैरजमानत वारंट) हासिल करने का प्रयास करेगी। एसआइटी इसके लिए बुधवार को कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी।

मंगलवार को आरोपितों के घरों समेत कुछ अन्य स्थानों पर दबिशें भी दी गईं, लेकिन पुलिस उनका कोई ठोस सुराग नहीं लगा सकी। आरोपित पुलिसकर्मी बेहद चालाकी से अब तक अपने ही विभाग को चकमा देने में कामयाब रहे हैं।

यही वजह है कि उन्हें कुछ पुलिसकर्मियों की ही मदद मिलने की आशंका भी जताई जा रही है। डीजीपी मुकुल गोयल का कहना है कि प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआइटी पूरी गहनता से जांच कर रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मनीष हत्याकांड को बेहद गंभीरता से लिया है। इस वारदात के बाद ही योगी ने दागी पुलिसकर्मियों को विभाग से बाहर का रास्ता दिखाए जाने का कड़ा निर्देश भी दिया था। एक अक्टूबर को सरकार ने मनीष हत्याकांड की सीबीआइ जांच कराए जाने की संस्तुति की थी।

हालांकि सीबीआइ ने अब तक इस मामले की जांच अपने हाथों में नहीं ली है। दूसरी ओर गोरखपुर में दर्ज कराए गए हत्या के मुकदमे की विवेचना कानपुर कमिश्नरेट में अपर पुलिस आयुक्त आनंद तिवारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एसआइटी कर रही है।

पुलिस कमिश्नर कानपुर असीम अरुण ने बताया कि विवेचना में नामजद आरोपित निरीक्षक जगत नारायण सिंह, उपनिरीक्षक अक्षय कुमार मिश्र व विजय कुमार यादव के अलावा आरोपित उपनिरीक्षक राहुल दुबे, मुख्य आरक्षी कमलेश यादव व आरक्षी प्रशांत कुमार के नाम सामने आए हैं।

सभी छह पुलिसकर्मियों की तलाश कराई जा रही है। आरोपित पुलिसकर्मियों की तलाश में लगी अलग-अलग टीमों ने मंगलवार को अमेठी, गाजीपुर, मीरजापुर,जौनपुर बलिया व गोरखपुर में दबिश दी।

आरोपित पुलिसकर्मियों के घरों के अलावा अन्य संभावित स्थानों पर छानबीन की गई। सर्विलांस की मदद से भी उनकी तलाश कराई जा रही है।

हालांकि अब तक सभी आरोपित पुलिसकर्मी अपने विभाग के बड़ों को चकमा देने में कामयाब हैं। उन पर कोई खास दबाव नहीं बन सका है। एसटीएफ की टीमें भी अब उनके पीछे लग गई हैं।

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