केंद्र की मोदी सरकार उज्ज्वला योजना लेकर आई है जिससे गरीबों को लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने से निजात मिल सके। गरीब की महिलाओं की आंखों से बहता हुआ आंसू रोका जा सके।

उज्ज्वला योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को मुफ्त में गैस सिलेंडर दिए गए लेकिन बेतहाशा बढ़ती हुई महंगाई के चलते गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि के कारण गरीबों को इस सिलेंडर को भराने में बड़ी ही मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।

स्मृति ईरानी के अमेठी में ऐसे लाभार्थी आज भी हैं, जो सिलेंडर को घर में रखे हुए हैं और चूल्हे पर खाना बना रहे हैं। उनका कहना है कि इस समय सिलेंडर के दाम एक हजार रुपए हो चुका है ऐसे में हम 300 की दिहाड़ी मजदूरी करने वाले अपने बच्चों का पेट पाले या गैस सिलेंडर भराए?

30 परसेंट ही लाभार्थी रीफिल कर रहा सिलेंड
हाल ही में सरकार ने गैस सिलेंडर का दाम ऐसा बढ़ाया कि गैस सिलेंडर के दाम 400 से बढ़कर 1000 तक पहुंच चुके हैं। जब 400 का सिलेंडर था तब लगभग 80% उज्जवला योजना के लाभार्थी गैस चूल्हे का प्रयोग करते थे पर जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती गई लाभार्थियों की क्षमता घटती चली गई।

आज अगर हम बात करें तो यहां कुल लाभार्थियों में से केवल 30% लाभार्थी ऐसे हैं जो अपने सिलेंडर को रीफिल करा रहे हैं और गैस पर खाना पका रहे हैं।

हर महीने नहीं भरा सकते महंगा सिलेंडर
70% लाभार्थी इस गैस चूल्हे का उपयोग नहीं कर रहे हैं। वह उनके घर में के एक कोने में पड़े धूल मिट्टी फांक रहा है। लाभार्थियों का कहना है कि सरकार यदि गैस सिलेंडर के दामों में कमी लाती है तो हम लोग इसका उपयोग कर पाएंगे अन्यथा हम लोगों के लिए यह बेकार है।

दाम कम होते तो न होती समस्या
कुछ लाभार्थियों ने तो यहां तक कहा कि यदि सरकार इस कनेक्शन का पैसा एक बार ले ली होती लेकिन बार-बार होने वाली रीफिलिंग के दाम कम होते तो हम लोगों को समस्या न होती।

हम एक बार तो कहीं से व्यवस्था कर सकते हैं लेकिन हर महीने का खर्च हम गरीबों को मार ही डालेगा। इस प्रकार सरकार के द्वारा जो उद्देश्य लेकर यह योजना लागू की गई वह कहीं न कहीं विफल नजर आ रही है।

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