देश के बैंकों, म्यूचुअल फंड, डीमैट खातों, बीमा आदि में पड़ी करीब 82 हजार करोड़ रुपये की रकम का कोई दावेदार नहीं (Unclaimed Money) है। हाल के एक सर्वे से यह जानकारी सामने आई है।

इसकी मुख्य वजह यह है कि बहुत से लोग अपने निवेश के ऐसे खातों में किसी नॉमिनी का नाम डालना भूल जाते हैं। यह फिर कई बार तकनीकी गलतियां होती है।


उदाहरण के लिए डीमैट अकाउंट खोलना साल 2016 से ही पूरी तरह से ही डिजिटल हो चुका है, लेकिन नॉमिनी ऐड करना फिजिकल प्रोसेस था, जिसकी वजह से बहुत से लोग ऐसा करना भूल जाते थे।

अब बात यह है कि इतना भरी अमाउंट का क्या होगा ?

यह पैसा जनता का है। डीमैट अकॉउंट में आधार जैसे KYC होती है उस आधार के लिंक से उनके परिजनों को खोजना आसान है क्यूंकि आधार परिवार के अन्य सदस्य का आधार बना हो तो सभी सिंक हो जाता है। बस सरकार की नियत साफ़ हो जनता का पैसा जनता को लौटाने के लिए

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