गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर हाल ही में 3,000 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी गई है जिसकी कीमत 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की है। इससे देश में ड्रग्स की तस्करी के बड़े खतरे का संकेत मिल रहा है।

यह चिंता का एक बड़ा कारण है क्योंकि अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने वाले आतंकवादी संगठन तालिबान के लिए ड्रग्स की तस्करी आमदनी का एक बड़ा जरिया है।

वंही सोशल मीडिया पर ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि भारत में इतना बड़ा मात्रा में ड्रग्स की खेफ पकड़ा जाना दर्शाता है कि भारत अफगान की ड्रग्स का उपभोक्ता तो नहीं बनता जा रहा है। यह देश में पकड़ी गई हेरोइन की अभी तक की सबसे बड़ी खेप बताई जा रही है। इसके अलावा दुनिया भर में भी यह ड्रग्स के पकड़े गए बड़े कंसाइनमेंट्स में से एक है।

हाल के महीनों में ड्रग्स की पकड़े जाने के मामले बढ़े हैं। अप्रैल में नौसेना ने श्रीलंका की एक मछली पकड़ने वाली नौका से 337 किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी, जिसकी कीमत लगभग 3,000 करोड़ रुपये थी।

ये हेरोइन ईरान-बलूचिस्तान क्षेत्र के पास मार्कन पोर्ट से लाई गई, जो अफगानिस्तान से हेरोइन की तस्करी के लिए बड़ा पोर्ट माना जाता है।अप्रैल में ही दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जांबिया के दो यात्रियों से 98 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई थी। मई में चेन्नई हवाई अड्डे पर तंजानिया के दो नागरिकों से इतनी ही मात्रा में हेरोइन पकड़ी गई थी।

पिछले वर्ष महामारी और लॉकडाउन के बावजूद नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट के तहत 59,806 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 44 प्रतिशत ड्रग्स की तस्करी और बाकी व्यक्तिगत खपत से जुड़े थे।

जानकारों का कहना है कि ड्रग्स की तस्करी देश के लिए एक गंभीर खतरा है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर, यशोवर्धन आजाद ने मनीकंट्रोल को बताया, “पंजाब में ड्रग्स के इस्तेमाल की समस्या बहुत बड़ी है जिससे समाज में कई समस्याएं हो रही है। ड्रग्स के साथ ही छोटे हथियार पाकिस्तान से देश में जम्मू और कश्मीर तक ड्रोन से भेजे जाते हैं। इसके अलावा पंजाब के निकट बॉर्डर पर नदियों के बीच बने रास्तों से भी ड्रग्स की तस्करी होती है।”

तालिबान से खतरा

अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर काबिज होने से सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किल बढ़ गई है। तालिबान की आमदनी का बड़ा जरिया ड्रग्स की तस्करी पर निर्भर है।

जानकारों का कहना है कि ड्रग्स की ऐसी कंसाइनमेंट्स के बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसे रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी के साथ ही समन्वय को भी बढ़ाने की जरूरत है।

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