मुजफ्फरनगर। रोजी पर आये संकट को दूर करने और खेती पर छाई समस्याओं की काली छाया को हटाने के लिए आज जीआईसी मैदान पर किसानों ने भारी संख्या में जुटकर अपने अधिकारों की आवाज उठाने का काम किया। किसानों ने इस महापंचायत के जरिये अपनी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का काम किया और फसल का लाभकारी मूल्य दिये जाने तथा खेती और किसान को बचाने के लिए सरकार से कदम उठाने की अपील की गई। महापंचायत में आध्यात्मिक किसान नेता चंद्रमोहन ने कहा कि सरकार यदि गन्ना किसानों की उपेक्षा कर रही है, तो याद रखे कि यह भगवान राम का अपमान है। देश के किसानों को खुशहाल बनाने के लिए उन्होंने एमएसपी गारंटी कानून लागू करने की मांग करते हुए कहा कि यह हमारा मूल अधिकार है।

किसानों की वास्तविक समस्याओं को लेकर आज इस पंचायत में मुजफ्फरनगर और शामली सहित कई जनपदों से किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों में सवार होकर पहुंचे थे। महापंचायत में महिलाओं ने भी भारी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए इस आयोजन को सफल बनाने का काम किया। महापंचायत के मंच पर हिन्द मजदूर किसान समिति के आधार और आध्यात्मिक किसान नेता चंद्रमोहन को गठवाला खाप की ओर से पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया

महापंचायत को सम्बोधित करते हुए चंद्रमोहन ने कहा कि आज किसानों के इस कार्यक्रम पर देश और दुनिया के साथ ही सत्ता तथा विपक्ष की नजर है। ये ऐसे किसानों और मजदूरों की महापंचायत है जो राष्ट्रप्रेमी है। यह सीधे सीएम योगी से हमारी मीटिंग हैं, वह सुन लें। यहां पर हम सरकार का विरोध करने के लिए जुटे हैं तो व्यवस्था परिवर्तन के लिए किये गये कार्यों को लेकर सरकार का आभार भी जता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यूपी से गुण्डाराज खत्म किया, बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ, सड़कों की दशा सुधरी, अच्छे रोड दिये, गौ हत्या बन्द कराई इसके लिए सीएम योगी का आभार है, लेकिन चार साल से गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया, बिजली महंगी हो गई, महंगाई बढ़ी, पेट्रोल के दाम बढ़ा दिये गये, आवारा पशुओं से किसानों की फसलों की सुरक्षा को कदम नहीं उठाया गया, ट्रैक्टर पर पाबंदी लगा दी गयी, यह सभी निर्णय किसान विरोधी हैं, इनको लेकर किसान परेशान है, पीड़ा में है

उन्होंने गन्ना किसानों को भगवान श्रीराम के वंश से जोड़ते हुए कहा कि उनके ही पूर्वजों ने ईंख की खेती शुरू की थी, यदि श्रीराम को मानने वाली यह सरकार गन्ना किसानों की उपेक्षा करती है तो यह भगवान राम का अपमान है। उन्होंने कहा कि किसानों के बारे में गंभीरता से सरकार को सोचना होगा।

आज गन्ना मूल्य का भावन चीनी के बाजार मूल्य से तय करने की व्यवस्था लागू की जाये। उन्होंने गन्ना और धान को राष्ट्रीय फसल घोषित करते हुए इन पर शोध कराने की मांग करते हुए कहा कि यूपी में सीएम योगी को पंजाब और हरियाणा के बराबर गन्ना मूल्य करना चाहिए। इससे किसान सम्पन्न होगा और किसान सम्पन्न होगा तो मजदूर भी मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि आवारा पशु किसानों की खेती को नष्ट कर रहे हैं। अफसर सुनते नहीं है, इस समस्या के समाधान के लिए यूपी डायल-112 जैसी सेवा शुरू करायें या गौवंशीय पशु के गोबर को 20 रुपये प्रति किलो सरकार खरीदे तो समाधान होगा।

उन्होंने कहा कि देश में आज भी सामाजिक विघटन की राजनीति हो रही है। अंग्रेज चले गये, लेकिन उनकी फूट डालो, राजनीति करो की व्यवस्था आज भी कायम है।

जातियों में समाज को बांटा जा रहा है, और यही जातिगत व्यवस्था देश के लिए घातक है। उन्होंने स्वामी सहजानंद सरस्वती को सबसे पहला किसान नेता बताते हुए कहा कि जातिवादी व्यवस्था के कारण ही उनके योगदान और बलिदान को भुलाया गया। उन्होंने कहा कि आज हमें वोट बैं की राजनीति करने वालों से जागरुक रहने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों के लिए सुरक्षा, सम्पन्नता और सम्मान की मांग करते हुए कहा कि हमें स्वाभिमान के साथ समाधान चाहिए। मजदूर किसान की समस्याओं पर सार्थक चर्चा का ही मतलब महापंचायत होता है। हम किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ेंगे, लेकिन व्यक्तिगत सम्बंध तो रखेंगे। उन्होंने मजदूरों के लिए दोगुनी पेंशन व्यवस्था की मांग करते हुए कहा कि देश में किसानों को एमएसपी गारंटी कानून सरकार दे, यह हमारा मूल अधिकार है, इसके बिना किसानों का कल्याण नहीं होगा।

गठवाला खाप के मुखिया चौ. राजेन्द्र सिंह मलिक ने कहा कि प्रदेश का मुखिया होने के नाते हम सीएम योगी आदित्यनाथ का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार को किसानों के प्रति अपनी नीति और सोच को भी बदलना होगा। यूपी में किसानों के प्रति सकारात्मक विचार रखने वाली सरकार ही रहेगी। उन्होंने कहा कि यदि किसान ही बाकी न रहा तो ये नेतागिरी किस पर की जायेगी। बिजली के दाम बढ़ा दिये, किसानों का ट्रेक्टर बन्द करा दिया।

मैं दावा करता हूं कि 10 साल में किसान नया ट्रेक्टर नहीं खरीद सकता। ये सरकार किसानों का ट्रेक्टर बन्द कराकर दिखाये, हम भी लड़ाई को तैयार हैं। 4 साल से इस सरकार ने गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया, हम चाहते हैं कि सरकार इन चार सालों में 20 रुपये प्रतिवर्ष का लाभ देते हुए इस बार 80 रुपये मूल्य बढ़ाये। हम 100 रुपये नहीं मांग रहे। सीएम जमीनी स्तर पर देखें किसान आज दुखी है, पीड़ित है। उन्होंने कहा कि सरकार समझ ले यह असली महापंचायत है। हम सरकार को एक सप्ताह का समय देते हैं, एक सप्ताह बाद फिर से मीटिंग की जायेगी और आगमी रणनीति पर विचार ह

Share.

Comments are closed.