पांच महीने बाद होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के पहले सियासी हलचल जारी हैं. बुधवार को फूलन देवी की बहन मुन्नी देवी ने शेर सिंह राणा की राजनीतिक पार्टी अहम पदाधिकारी के तौर पर जॉइन की।

साल 2001 में जब फूलन देवी की हत्या की गई थी, तब मुन्नी ने बयान दिया था कि राणा ने ही गोलियां चलाई थीं. फिर सबको चौंकाते हुए ट्रायल के दौरान 2007 में ही मुन्नी ने बयान बदला और कहा कि राणा को इस हत्याकांड में फंसाया गया और वास्तव में हत्या सांसद के पति उमेद सिंह ने करवाई थी।

इस बयान के बदले जाने के बावजूद 2014 में दिल्ली की अदालत ने राणा को उम्रकैद सुनाई थी, लेकिन 2016 में उसे ज़मानत पर छोड़ दिया गया।

हरिद्वार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुधवार को यह घोषणा की गई कि मुन्नी देवी राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी की उपाध्यक्ष होंगी. खबरों की मानें तो राणा द्वारा बनाई गई इस पार्टी में उत्तराखंड के लिए सह प्रभारी का दायित्व भी मुन्नी को मिला।

हालांकि इस प्रेस वार्ता में मुन्नी खुद मौजूद नहीं थीं, लेकिन उनके नाम से जारी एक धन्यवाद पत्र ज़रूर दिया गया. इस पत्र में मुन्नी ने राणा को धन्यवाद देते हुए लिखा कि जल्द ही उत्तराखंड में बेरोज़गारी के खिलाफ राज्य स्तरीय आंदोलन शुरू किया जाएगा।

आखिर क्या है ये पूरा माजरा?
अब सवाल यह है कि फूलन देवी की हत्या के मामले में सज़ायाफ्ता रहे राणा की पार्टी मुन्नी ने क्यों जॉइन की? बहरहाल : रुड़की के रहने वाले राणा की पार्टी ने पिछले दिनों हरिद्वार में एक बड़ी रैली की थी।

राणा ऐलान कर चुके हैं कि उनकी पार्टी उत्तराखंड में चुनाव लड़ेगी. इधर, इस घटनाक्रम के बाद फूलन की बहन ने बातचीत में कहा, ‘मैंने पार्टी अपनी इच्छा से जॉइन की है. मुझे और कुछ नहीं कहना क्योंकि अपनी बहन की हत्या के पीछे के सच के बारे में पहले ही मैं काफी कुछ कह चुकी हूं।

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