एक जानकारी के मुताबिक PM मोदी की विदेश यात्राओं पर अब 588 करोड़ रुपये खर्च हुए है, कार्यकाल में किए हैं 60 विदेशी दौरे की बात भी कही गई है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी का अमेरिका का यह सातवां दौरा है।

पीएम मोदी ने अपना पहला अमेरिकी दौरा सितंबर 2014 में किया था। पीएमइंडिया वेबसाइट पर उपलब्‍ध जानकारी के मुताबिक 26 मई, 2014 से लेकर अबतक प्रधानमंत्री मोदी ने कुल 60 विदेशी दौरे किए हैं। ​प्रधानमंत्री की इन विदेश यात्राओं पर खर्च का ब्‍यौरा भी वेबसाइट पर दिया गया है। इन सभी विदेशी दौरों पर कुल 5,88,52,88,763 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश यात्राओं की शुरुआत भूटान के दौरे के साथ की थी। पीएम मोदी 15-16 जून 2014 को भूटान के दौरे पर गए थे। इ

स दौरे पर कुल 2,45,27,465 रुपये खर्च हुए थे। इसके बाद उन्‍होंने क्रमश: ब्राजील, नेपाल और जापान का दौरा किया। पांचवां दौरा अमेरिका का था, जो 25 सितंबर से 1 अक्‍टूबर के दौरान हुआ। इस यात्रा पर उस समय 19,04,60,000 रुपये खर्च हुए थे।

दूसरे कार्यकाल में पहला दौरा मालद्वीप और श्रीलंका का

मई 2019 में दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्‍ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विदेशी सफर की शुरुआत मालद्वीप और श्रीलंका के दौरे के साथ की।

पीएम मोदी 8-9 जून, 2019 को मालद्वीप और श्रीलंका के दौरे पर गए थे और इस दौरे का खर्च भारतीय वायुसेना के खाते में है, क्‍योंकि यह यात्रा आईएएफ के बीबीजे एयरक्राफ्ट से की गई थी।

भारत में रिकॉर्ड विदेशी निवेश दावा पर लोग क्यों रहे बेरोजगार ?

 जानकारों के मुताबिक भारत जैसे विकासशील देशों में उद्योग-धंधे बढ़ाने और नौकरियां पैदा करने में एफडीआई का अहम रोल होता है। इससे देश के बुनियादी ढांचे का विकास भी होता है। हालांकि अब तक एफडीआई और नौकरियों के बीच सीधा संबंध नहीं बिठाया जा सका है।

अप्रैल 2021 में कुल 6.24 अरब डॉलर एफडीआई (FDI) आया है। यह अप्रैल 2020 में 4.53 अरब डॉलर की तुलना में 38 प्रतिशत ज्यादा है।रिकॉर्ड एफडीआई आने के बावजूद भारत में नौकरियों के अवसर नहीं बने।

जानकारों के मुताबिक दरअसल भारत सरकार की अपनी पीठ थपथपाने वाली प्रेस रिलीज से एफडीआई की असल स्थिति स्पष्ट नहीं होती। इसमें सिर्फ बिजनेस सेगमेंट और राज्यों को मिले एफडीआई की लिस्ट दे दी गई है।

विदेशी निवेश पर ढंग से रोशनी डालने वाला डॉक्यूमेंट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का बुलेटिन है। जिसमें ज्यादा स्पष्ट जानकारियां हैं। इसके मुताबिक 60 खरब रुपये के जिस कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की बात सरकार की ओर से कही गई है, उसके दो हिस्से हैं।

पहला, सीधे भारत में हुआ निवेश और दूसरा, विदेशी निवेशकों द्वारा भारत से निकाला गया पैसा।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में हुए सीधे निवेश में इस साल 2.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। और विदेशी निवेशकों ने इस साल, पिछले साल के मुकाबले 47 प्रतिशत ज्यादा पैसा भारत से निकाला है।

रिजर्व बैंक मानता है कि भारत में हुए सीधे निवेश और कुल एफडीआई आंकड़ों में भारी अंतर है। जानकारों के मुताबिक कुल विदेशी निवेश में 10 फीसदी की बढ़ोतरी का दावा करने के लिए आंकड़ों में नेट पोर्टफोलियो इंवेस्टमेंट को भी शामिल कर लिया गया है।

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