मालदा, 21 सितंबर। असमर्थ होने के बावजूद दा परिवार की दो बेटियां अपने पूर्वजों के हाथों शुरू की गयी दुर्गौ पूजा का आयोजन बरक़रार रखी है।

दोनों बहनों की आय के श्रोत के रूप में ट्यूशन पढ़ाना एवं घरों में खाना बनाने का काम है। ओल्ड मालदा के दा परिवार की दो बहनें प्रभादेवी और जयदेवी अपने साल भर की बचत एंव पड़ोसियों की आर्थिक मदद से अपने पूर्वजों की इस परंपरा को जीवित रखी है। दा परिवार का जीर्ण-शीर्ण मकान ओल्ड मालदा नगर पालिका के वार्ड 4 के तुतबाड़ी इलाके में स्थित है। वहां दो बहनें प्रभा दा और जया दा रहती हैं।

हालांकि प्रभादेवी शादीशुदा हैं, लेकिन उनके पति से उनका रिश्ता टूट चुका है। वह अपनी इकलौती बेटी को अपने पिता के घर में रहती है। प्रभादेवी की छोटी बहन जया दा अविवाहित हैं।

दोनों दो अलग-अलग पेशों से जुडी हैं। गौरतलब है दुर्गा पूजा में अब कुछ ही दिन शेष हैं। घर में माँ दुर्गा की मूर्ति बनाने का काम शुरू हो गया है।

इलाके का एक कुम्हार देवी दुर्गा की मूर्ति बना रहा है। लेकिन परिवार के सैकड़ों कष्टों के बावजूद, दा परिवार की दो महिला सदस्यों में दुर्गा पूजा के आयोजन को लेकर उत्साह में कोई कमी नहीं है। भीषण कठिनाई में परिवार चलाने के बावजूद उन्होंने देवी दुर्गा की पूजा में कोई कसर नहीं रखना चाहती ।

दूसरी ओर दुर्गा पूजा के आयोजन में आस पास के लोग भी इस परिवार को तरह-तरह से सहायता कर रहे हैं। दा परिवार की दो अधेड़ उम्र की बहनें पचास साल से अधिक पुरानी इस ऐतिहासिक दुर्गा पूजा के अस्तित्व को किसी तरह बचा रखा है। प्रभा दा और जया दा ने बताया कि घर की दुर्गा पूजा पिता और दादा के हाथ से शुरू की गई थी।

उनके निधन के बाद मां यह पूजा कर रही थीं। लेकिन बूढ़ी मां के निधन के बाद अब उनके कंधों पर इस पूजा की जिम्मेदारी आ गई है. घर में कोई पुरुष नहीं है। इसलिए अब यह जिम्मेदारी उनके कंधो पर आ गयी है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक यह पूजा करीब 50 साल से चली आ रही है।

वर्तमान में पूजा के आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रही दोनों बहनों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। पड़ोसियों की मदद से पैसे उधार लेकर देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। महा नवमी के दिन स्थानीय लोगों को भोजन कराया जाता है . प्रभा और जय देवी ने कहा कि वे वंश की पुरानी परंपरा को बनाए रखने के लिए यह पूजा कर रही हैं।

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