इलाहाबाद HC ने कहा- दो वयस्क व्यक्तियों के पास अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने का अधिकार है, भले ही उनका धर्म कुछ भी हो। जिसके बाद सवाल है क्या धर्म और जाति को आधार बनाकर सामाजिक ध्रुवीकरण और राजनैतिक लाभ के लिए फैलाये गए कथित उन्माद के आरोपियों पर राजद्रोह के तहत कार्यवाही होगी।

पीठ ने पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इन याचिकाकर्ताओं को उनके माता पिता द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी तरह से परेशान न किया जाए। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि युवती ने मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने के लिए एक आवेदन भी दाखिल किया है। इस आवेदन पर जिलाधिकारी ने संबंधित थाने से रिपोर्ट मंगाई है।

जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस दीपक वर्मा की पीठ ने मुस्लिम महिला शिफा हसन और उसके हिंदू साथी द्वारा दायर की गयी एक याचिका पर यह आदेश पारित किया। इन याचिकाकर्ताओं की दलील है कि वे एक दूसरे से प्रेम करते हैं और अपनी इच्छा से साथ में रह रहे हैं।

हाल में धर्म परिवर्तन के नाम हिंसा कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे जिसमे कई शादियां परिवार वालों की मर्जी से हो रही थी उनमे भी बजरंग दल, हिन्दू परिषद् के लोगों ने हंगामा किया कई मामलो में पुलिस मुखदर्शक बानी बैठी थी।

कोर्ट के इस आदेश के बाद सवाल उठता है किया ऐसे कथित उपद्रवियों के खिलाफ कार्यवाही होगी।

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