राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने मुंद्रा पोर्ट पर दो शिपिंग कंटेनर जब्त किए जो अफगानिस्तान से कम से कम 2,000 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थों के साथ आए थे। मुंद्रा पोर्ट मशहूर औद्योगिक घराने अडानी समूह से जुड़ा हुआ बताया जाता है।

इस घटना के प्रकाश में आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग केंद्र सरकार पर सवाल करते हुए कह रहे है “सरकार का तालिबान के प्रति प्रेम का एक कारण कथति मित्र व्यापार हो सकता है. जिसको लेकर सरकार तालिबान के प्रति कुछ भी कहने से बचती रही है।”

आज भी कितनी भारतीय वहां फंसे है उनका सही डाटा सार्वजानिक नहीं किया नहीं क्या प्लान है इसकी कोई खबर है हालंकि बड़े व्यापारीयों को निकाल लिया है लेकिन न जाने कितने मजदूर और अन्य कार्य वाले वहां फंसे है जिनको उनके हाल पर पैदल आने को छोड़ दिया है।

अडाणी ग्रुप द्वारा संचालित मुंदड़ा बंदरगाह देश के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है। डीआरआई के सूत्रों के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 38 बैग में हेरोइन ले जाने वाले कंटेनरों (Containers) को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा (Vijaywada) स्थित एक फर्म द्वारा आयात किया गया था।

फर्म ने खेप को “टैल्कम पाउडर” घोषित किया था। निर्यातक फर्म की पहचान अफगानिस्तान के कंधार (Kandhar) में स्थित हसन हुसैन लिमिटेड के रूप में की गई है।

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “खेप अफगानिस्तान से आई है और उन्हें ईरान (Iran) के बंदर अब्बास में लाद दिया गया था।”

उन्होंने कहा, ”नशीले पदार्थों की कुल राशि करीब 2,000 करोड़ रुपये होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कंटेनरों में नशीला पदार्थ होने का अंदेशा था। सूत्रों ने कहा कि डीआरआई गांधीधाम ने इन दो कंटेनरों को जब्त किया है, जिनमें कुल 38 बैग थे। जिन्हें कथित तौर पर गलत घोषित किया गया था।



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