चौरी-चौरा घटना के कुछ शहीदों के नामों में फेरबदल और उम्र क़ैद पाने वाले 14 स्वतंत्रता सेनानियों में से सिर्फ़ सवर्ण जाति से जुड़े एक व्यक्ति की प्रतिमा स्मारक में स्थापित किए जाने पर सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या ये स्वतंत्रता संग्राम में दलितों और पिछड़ों के योगदान को धीरे-धीरे मिटाने की कोशिश है?

पुरानी पट्टिका के ‘श्री लौटू पुत्र शिवनन्दन कहार’ में से ‘कहार’ शब्द नई तख़्ती से ग़ायब है। वहीं ‘श्री रामलगन पुत्र शिवटहल लोहार’ अब शहीद रामलगन पुत्र शिवटहल के नाम से दिख रहे हैं। लाल मुहम्मद को लाल अहमद और शिवनन्दन को शिवचरन के तौर पर अंकित करने की ‘छूट’ भी नई तख़्ती में दिखाई देती है।

सवर्णों के सरनेम क्यों नहीं हटाए गए?

घटना से जुड़े परिवारों की शिकायत को लेकर जब हमने अधिकारियों से मिलने की कोशिश की तो हमें एक व्यक्ति से दूसरे तक भेजा जाता रहा है।

स्मारक समिति के संयोजक हालांकि ये जोड़ना नहीं भूलते कि शहीदों या परिवार के लोगों के नाम से जाति का नाम हटा देने से कोई फर्क़ नहीं पड़ता है लेकिन जबसे उनसे ये पूछा गया कि घटना से जुड़े सवर्ण लोगों के सरनेम क्यों नहीं हटाए गए तो उनके पास कोई उचित जवाब नहीं था।

क्या है पूरा मामला?

चौरी-चौरा की घटना की याद में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर से क़रीब 26 किलोमीटर दूर 1993 में स्मारक तैयार हुआ था, जिसका पिछले दो सालों में सौंदर्यीकरण करवाए जाने के बाद साल 2021 जनवरी में लोकार्पण हुआ है।

विवाद स्मारक में पुरानी तख़्ती की जगह नई तख़्ती लगाने के बाद शुरू हुआ है। नई पट्टिका में कई नामों में फेरबदल साफ़ नज़र आता है। आजीवन कारावास पाने वाले 14 में से सिर्फ़ एक व्यक्ति, द्वारिका प्रसाद पांडेय पुत्र नेपाल पांडेय की ही प्रतिमा लगाए जाने को लेकर भी विवाद है।

डुमरी खुर्द निवासी बिक्रम अहीर को इसी घटना के लिए फ़ांसी दी गई थी। उनके पड़पोते शरदानंद यादव कहते हैं, “सेशन कोर्ट ने जिन 172 लोगों को फ़ांसी की सज़ा सुनाई थी, उसे देखिए और बताइए कि उसमें अपर कास्ट के कितने लोग हैं. यह किसानों और मज़दूरों का आंदोलन था, ज़मींदारी प्रथा के सताए हुए लोग. सरकार उन लोगों के योगदान को धीर-धीरे मिटा देना चाहती है.”

लाल मुहम्मद जिन्हें 3 जुलाई, 1923 को फ़ांसी हुई थी, उनके पोते मैनुद्दीन ने दादा और परदादा के नामों को ‘सुधरवाने के लिए’ मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

मैनुद्दीन कहते हैं, “स्मारक में लगी मूर्तियों में हमारी पहचान को छिपा दिया गया है. हम फक़ीर बिरादरी के हैं. लेकिन अब उसे बदल दिया गया है.”

वो कहते हैं, “जिन्होंने हिंदुस्तान के लिए इतना बड़ा काम किया, अगर आप उन्हें पहचान नहीं दे सकते हैं तो कम से कम उनकी पहचान को तो न ख़राब किया जाए.”

चौरी-चौरा कांड में फाँसी तथा जेल की सजा पाने वाले अनुसूचित जाति के क्रांतकारियों के नाम कुछ इस तरह है –

  • रामपति चमार आत्मज श्री जिउत,म चकिया चौरा,जिला गोरखपुर ने फांसी ।
  • सम्पति चमार,आत्मज श्री पति चमार ग्राम थाना- चौरा,गोरखपुर, धारा 302 के तहत 1923 में फांसी।
  • अयोध्या प्रसाद चमार आत्मज श्री महंगी चमार ग्राम – मोती पाकड़,थाना- चौरा जिला-गोरखपुर चौरी चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1924 में 5,वर्ष का कारावास
  • कल्लू चमार आत्मज श्री सुमन चमार, ग्राम गोगरा,थाना-झगहा, जिला गोरखपुर, चौरी चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1924 में 5,वर्ष का कारावास।
  • गरीब चमार आत्मज श्री मंहगी चमार ,ग्राम रेवती बाजार, थाना चौरी-चौरा,जिला गोरखपुर,चौरी चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1924 में 5,वर्ष का कारावास।
  • नोहर चमार आत्मज श्री देवीदीन चमार,चौरी चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1924 में 6,वर्ष का कारावास।
  • फलई चमार आत्मज श्री सुमन चमार ग्राम व थाना चौरा-चौरी,चौरी चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1923 में 5,वर्ष का कारावास पहले इन्हें फांसी की सजा हुई थी जो बाद में 5,वर्ष की सजा में परिवर्तित हो गयी।
  • बिरजा चमार आत्मज धवल चमार ग्राम-डुमरी,थाना चौरा,चौरी चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1923 में 5,वर्ष का कारावास।
  • मेढ़ई चमार आत्मज बुधई चमार गोरखपुर चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1923 में 5,वर्ष का कारावास।
  • जगेशर पासी आत्मज श्री रामफल पासी, ग्राम-डुमरी थाना-चौरी चौरा,चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1923 में 5,वर्ष का कारावास।
  • मंडी चमार आत्मज श्री मुरली चमार, ग्राम मदनपुर,गोरखपुर चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1922 में 5,वर्ष का कारावास।
  • अलगू पासी आत्मज श्री सुक्खू पासी,ग्राम भाग पट्टी थाना-चौरा,जिला गोरखपुर,चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1924 में 5,वर्ष का कठिन कारावास।
  • छोटू पासी ग्राम चकिया,जिला-गोरखपुर,मुकदमे के दौरान जेल में वीरगति पाई।
  • रघुनाथ पासी आत्मज श्री बरन पासी,थाना-चौरा,जिला गोरखपुर,चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत फांसी की सजा हुई थी जो बाद में बदलकर 5,वर्ष की सजा हुई।
  • रामजस पासी आत्मज श्री जगरूप पासी, ग्राम करौता,थाना-चौरी-चौरा,कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत फांसी की सजा हुई थी जो बाद में बदलकर 5,वर्ष की सजा हुई।
  • रामशरन पासी निवासी-गोरखपुर, चौरा कांड के सिलसिले में धारा-302 के अन्तर्गत 1923 में 8,वर्ष का कठिन कारावास।

इतिहासकारों ने इस तथ्य को रेखांकित किया है कि यह घटना पिछड़े, दलित और मुस्लिम गरीब किसानों की स्थानीय उच्च जातीय ज़मींदारों और ब्रिटिश सत्ता के गठजोड़ के खिलाफ बगावत थी,जिसकी लंबे समय तक तैयारी की गई थी थाना जलाने की योजना इसमें शामिल नहीं था।

संदर्भ :स्वतंत्रता संग्राम” में ‘अछूतों का योगदान पेज नं-71,72,73,74,75
     कंटेंट (बीबीसी इनपुट)
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