देश में उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने का गजब का खेल है डिग्री धारक और काबिल लोगों को NFS (नॉन फाउंड सूटेबल) कर दिया जाता है जबकि, कथित गैर डीफ्री धारक को जातिऔर जुगाड़ के आधार पर डायरेक्टर जैसे पदों पर नियुक्त कर दिया जाता है।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) रोहतक के डायरेक्टर के कार्यकाल में अब मुश्किल से पांच महीने का वक्त बचा है, लेकिन अब तक सरकार उनसे ग्रेजुएट का डिग्री सर्टिफिकेट भी नहीं ले सकी है।

रेकॉर्ड के मुताबिक शिक्षा मंत्रालय ने इसी साल दो बार IIM रोहतक के डायरेक्टर धीरज शर्मा को पत्र लिखकर शैक्षिक प्रमाणपत्रों को वेरिफाई करने के लिए कहा लेकिन उधर से कोई जवाब ही नहीं दिया गया।

बता दें कि धीरज शर्मा पर अयोग्यता के आरोप भी लगे थे और कोर्ट में सरकार ने उनका पक्ष लिया था। मंत्रालय ने पहला पत्र 18 फरवरी को लिखा था। यह पिछले पत्र के रिमाइंडर के तौर पर भेजा गया था। शर्मा की नियुक्ति को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह इस पद के लिए अयोग्य हैं और उनकी शैक्षिक योग्यता इस लायक नहीं है।

IIM का डायरेक्टर बनने के लिए फर्स्ट क्लास बैचलर डिग्री की जरूरत होती है। शिक्षा मंत्रालय के पास शर्मा की एमबीए डिग्री (डॉ. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी) और PhD डिग्री (लूसियाना टेक यूनिवर्सिटी, अमेरिका) की कॉपी हैं लेकिन अंडर ग्रैजुएट डिग्री का कोई रेकॉर्ड मौजूद नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फरवरी 2017 में बिना जरूरी दस्तावेज के उनकी नियुक्ति कैसे की गई थी।

मंत्रालय के सीनियर अधिकारियों का कहना है कि पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में सरकार को रिप्रजंट करने वाले वकील से कहा गया है कि वह शर्मा की डिग्री सर्टिफिकेट लेकर कोर्ट में पेश करें ताकि याचिकाकर्ता के तर्कों को खारिज किया जा सके।

इसी साल फरवरी में दाखिल किए गए हलफनामे में सरकार की तरफ से नियुक्ति को डिफेंड किया गया और कहा गया कि याचिकाकर्ता के दावों का कोई आधार नहीं है। इसमें कहा गया है कि 60 लोगों ने इस पोस्ट के लिए अप्लाई किया था लेकिन उनमें से किसी ने नियुक्ति को चुनौती नहीं दी।

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