जनपद न्यायालय परिसर स्थित मनोरंजन हाल में हिन्दी दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश डॉ अजय कृष्ण विश्वेश ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश डॉ अजय कृष्ण विश्वेश ने अपने न्यायिक अधिकारियों एव अधिवक्ताओं का आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक सरल भाषा में अपने न्यायिक कार्यों में उपयोग करें। जिससे वादकारी आसानी से समझ सके।

उन्होंने आगे कहा कि, हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए उच्च न्यायालय स्तर के भी कुछ न्यायाधीश अब हिन्दी मे भी अपने निर्णय दे रहे है, इसलिए हमें भी अधिक से अधिक हिन्दी भाषा का उपयोग करना चाहिए।

इस कार्यक्रम मे विशिष्ट अतिथि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी ने कहा हिन्दी भाषा अपनी शक्ति के आधार पर ही आज मजबूत स्थिति में है, लेकिन आज हम हिन्दी शिक्षा के क्षेत्र मे कमजोर हो रहे है।

हिन्दी ज्ञान की भाषा है इसलिए इसका इतना महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी के क्षेत्र मे पं महामना मदन मोहन मालवीय जी का भी काफी योगदान रहा है। उन्हीं की देन है कि निचली अदालतो मे हिन्दी भाषा का विशेष तौर पर उपयोग किया जाता है।

हमें हिन्दी भाषा को और मजबूत करने की आवश्यकता है ,उन्होंने न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं से अपेक्षा की गयी कि अपने कार्यो मे सरल से सरल भाषा का उपयोग करें ताकि ग्रामीण अचल के वादकारी भी सरलता से समझ सके ।

इस अवसर पर प्रदीप कुमार सिंह, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय एव राजेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो संजीव सिन्हा, अपर जिला जज प्रमोद कुमार गिरि, अर्पिता सिह, अनिल यादव व न्यायिक अधिकारियों ने हिन्दी दिवस पर अपने अपने विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम का संचालन अश्विनी उपाध्याय एवं सौम्या ने किया ने किया। इस अवसर सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुमुद लता त्रिपाठी सहित जनपद न्यायालय के सभी न्यायिक अधिकारी एव वरिष्ठ अधिवक्ता आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अन्त में अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पुष्कर उपाध्याय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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