आपको याद है 2017 में पटना यूनिवर्सिटी के सौ साल होने के मौके पर बोलते हुए नरेंद्र मोदी नेएक योजना के बारे में एलान किया था। उस वक्त उनकी सभा में बैठे नौजवान के मोदी मोदी करने और ताली बजा रहे थे।

वहां पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मांग की थी कि इसे केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जाए ताकि कुछ आर्थिक मदद मिल जाए और लड़खड़ाता सा यह विश्वविद्यालय थोड़ा चलने लगे। वैसे तो राज्य सरकार को ही यह जवाबदेही लेनी चाहिए थी कि उसके राज्य में एक यूनिवर्सिटी तो कम से कम ढंग की हो।

यह हाल केवल बिहार का नहीं बल्कि हर प्रदेश की विवि का हाल यही है। अधिकरत कार्य ठेके पर होते है यहां तक शिक्षक भी ठेके पर होते है इसी लिए शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। वंही सरक़ार सरकारी संस्थानों को भूल शिक्षा निजीकरण की अधिक ध्यान दे रही है।

आज प्रधानमंत्री मोदी अलीगढ़ में हैं। वहां पर एक नई यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखने जा रहे हैं। यूपी के छात्र ही बता सकते हैं कि पांच साल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी की कितनी यूनिवर्सिटी में गए हैं। यह भी सवाल है चार साल राम मंदिर मस्जिद, शमसान के बाद अब चुनाव के समय सरकार को विश्विद्यालय याद या है।

अलीगढ़ नाम का एक खास सियासी महत्व है इसलिए वहां पर आधारशिला रखी जा रही है। इस वक्त इस बात से उत्साहित लोग नोट करेंगे कि यह यूनिवर्सिटी कितने साल में बनकर तैयार होती है, इसकी पूरी फैक्लटी बहाल होती है या नहीं। आप जानते हैं कि एम्स के नाम पर क्या होता है। एलान होता है और एम्स दस बीस साल तक बनता ही रहता है।

उत्तर प्रदेश के तमाम कालेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़े छात्रों से अगर पूँछा जाए की पिछले पांच साल और पहले के भी पांच या इस सरकार के पांच वर्ष बाद आपके विश्विद्यालय में क्या बेहतर बदलाव हुए है तो हकीकत पता चल जायेगा की आखिर विकास कान्हा हुआ है।

दरअसल इसका मूल्याकंन करना सभी को नहीं आएगा लेकिन कोशिश करेंगे तो आप समझ पाएंगे कि आपके जीवन को कैसे बर्बाद किया गया है। अगर आप अलीगढ़ बनाम अलीगढ़ की जगह इसी बहाने उच्च शिक्षा की बात करेंगे तो बेहतर होगा। आपका भी और उत्तर प्रदेश का भी।

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