बीजेपी विधायक श्रीमंत बालासाहेब पाटिल ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिराने से पहले उन्हें कांग्रेस छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने के लिए पैसे की पेशकश की गई थी।

 हालांकि, उन्होंने इसके बाद एक और बयान जारी कर कहा कि उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए पैसे नहीं लिए। पाटिल ने कहा कि उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लिए पैसे की पेशकश की गई थी और उनसे कहा गया था कि वह कितना भी पैसा मांग सकते हैं, लेकिन इसके बजाय उन्होंने लोगों की सेवा के लिए मंत्री पद की मांग की।

श्रीमंत बालासाहेब पाटिल ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें वर्तमान सरकार में मंत्री पद क्यों नहीं दिया गया लेकिन, उनसे वादा किया गया है कि अगले विस्तार में उन्हें मंत्री का पद मिलेगा. उन्होंने बताया कि उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से भी बात की थी। श्रीमंत पाटिल कर्नाटक के कागवाड़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वह शुरू में कांग्रेस से जुड़े थे लेकिन, जुलाई 2019 में खेमा बदल दिया।

हालांकि, इसके बाद उन्होंने एक और बयान जारी किया कि उनके पास पैसे लेकर कोई नहीं आया। वह खुद बीजेपी के पास गए। उन्होंने पाटिल से पूछा कि वह बीजेपी का समर्थन क्यों करना चाहते हैं तो पाटिल ने कहा कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, अगर वे सरकार बनाते हैं तो बस एक अच्छा पोर्टफोलियो है। अगर कोई पैसे की पेशकश भी करता है, तो भी मैं स्वीकार नहीं करूंगा। मैंने पैसे नहीं लिए।

बोम्मई के CM बनने के बाद कैबिनेट से हटा दिया गया

बालासाहेब पाटिल उन 16 विधायकों में से एक थे, जो कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (JDS) से बीजेपी में शामिल हुए थे, जिसके कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार गिर गई थी।

राज्य में येदियुरप्पा सरकार बनने के बाद उन्हें मंत्री पद दिया गया था। हालांकि, बीएस येदियुरप्पा के इस्तीफा देने और बसवराज बोम्मई के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया था।

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