उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में नगर निगम वार्ड 69 सरोजनी नगर के वासियों को कहीं न कहीं हृदय में एक कसक जरूर रहेगी कि आजादी के इतने सालों के बाद भी उन्हें स्वच्छ पेयजल मयस्सर नहीं हो पा रहा है। विडंबना तो यह है कि फरियाद करें तो किससे।

एक तरफ जहां सरकार गांव-गांव स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की बात करती है वहीं सरोजनी नगर की पेयजल आपूर्ति की यह बदहाली- उसके दावों की पोल खोल रही है। जो पेयजल आपूर्ति की जाती है उसका पाइप नाले से होकर जाता है।

हमेशा नाले के पानी के संपर्क में रहने के कारण कहीं-कहीं पेयजल आपूर्ति का पाइप जंग खाकर टूट गया है। जब पेयजल आपूर्ति का पंप नहीं चलता है उस समय नाली का गंदा पानी पाइप के क्षतिग्रस्त हिस्से से होकर उसके अंदर चला जाता है। जब पंप हाउस का मोटर चालू होता है तो उसके पानी के साथ नाली का यही गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंचता है। जिसे लोग पीने के लिए मजबूर हैं।

पेयजल आपूर्ति का पाइप हमेशा नाली के पानी के गंदे जल जमाव में डूबा रहता है। आस-पास का सारा गंदा पानी उसी परिसर में जाकर जमा होता है। जल और स्वच्छता समिति व पेयजल पर करोड़ों रुपए खर्च किये जाने के दावे किये जाते हैं। जब हासिल शून्य ही रहना है तो इतनी बड़ी रकम व्यर्थ किये जाने का मतलब नहीं समझ में आता है।

सरोजिनी नगर खास कर वहां रहने वाले साधारण परिवार के लोग इस कुव्यवस्था से सबसे अधिक प्रभावित है। इधर पाइप जलापूर्ति का पानी प्रदूषित ही रहता है। कमजोर तबके के लोग पेयजल आपूर्ति का गंदा पानी पीकर जल जन्य बीमारियों के शिकार होते रहते हैं।
इस पर एबी स्टार न्यूज़ के संवाददाता क़मर आलम ने जमीनी हकीकत को परखा जिसे हम आपके सामने दिखाने जा रहे हैं।

Share.

Comments are closed.