झांसी
चंद रुपयों की लालच में बिजली विभाग के जिम्मेदार अभियंता किस तरह से लोगों की जान से खेलते हैं, इसका जीता जागता उदाहरण बिजौली क्षेत्र है। इस क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर विद्युत संयोजन दे दिए गए हैं। एक ओर जहां नियमों के अंतर्गत विद्युत संयोजन पाने के लिए उपभोक्ताओं को बिजली विभाग के चक्कर लगाने तथा एड़ी चोटी का जोर लगाने पर मजबूर हो जाना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर नियमों को ताक पर रखकर विद्युत संयोजन देने में बिजली विभाग के जिम्मेदार अभियंता क्षण भर की देर नहीं लगाते।

बिजौली क्षेत्र के रामनगर इलाके में क्षेत्र के अवर अभियंता की मेहरबानी से नियमों को दरकिनार कर विद्युत संयोजन दिए गए हैं। स्थिति यह है कि नियमानुसार 100 मीटर के बिजली के खंभे होने पर ही विद्युत संयोजन दिया जा सकता है, लेकिन इस इलाके में दो-दो सौ, तीन-तीन सौ मीटर की दूरी पर विद्युत संयोजन दे दिए गए हैं।

परिणाम यह हो रहा है कि बिजली के तार लकड़ी की बल्लियों पर लटक रहे हैं। ऐसे में हादसा होने की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता। जनहानि की आशंका को किनारे रखकर सुविधा शुल्क के बलबूते पर लोगों ने संयोजन ले लिए हैं तो वहीं बिजली विभाग के जिम्मेदार अभियंताओं ने भी इस ओर देखने की जरूरत महसूस नहीं की। ऐसे में यदि कोई गंभीर हादसा होता है और जनहानि होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, यह एक बड़ा सवाल है।

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