म्यांमार में सैनिकों और प्रतिरोध बलों (रेजिस्टेंस फोर्स) के बीच जुलाई के बाद हुए सबसे घातक खूनी संघर्ष में कई किशोर छात्रों समेत 15 से 20 ग्रामीणों की जान चली गई. एक ग्रामीण और स्वतंत्र मीडिया की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. उत्तर-पश्चिमी मैगवे क्षेत्र में गंगव टाउनशिप के पास लड़ाई गुरुवार को शुरू हुई थी. लड़ाई से दो दिन पहले विपक्षी संगठन नेशनल यूनिटी गवर्मेंट ने राष्ट्रव्यापी विद्रोह का आह्वान जारी किया था.

एक स्थानीय निवासी ने न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को फोन पर बताया कि म्यिन थार और आसपास के पांच अन्य गांवों में क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए चार सैन्य वाहनों में 100 से अधिक सैनिकों के पहुंचने पर लड़ाई शुरू हुई. हल्के हथियारों से लैस गांव के आत्मरक्षा बल के सदस्यों ने चेतावनी देते हुए गोलियां चलाईं, लेकिन वे सैनिकों को इलाके में प्रवेश करने से नहीं रोक सके और उसके बाद भी संघर्ष जारी रहा.

आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार से सेना द्वारा फरवरी में सत्ता जब्त किए जाने के खिलाफ विरोध आंदोलन शुरू में शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में यह धीरे-धीरे उग्र होता चला गया. नेशनल यूनिटी गवर्मेंट के ‘लोगों के रक्षात्मक युद्ध’ के आह्वान को सोशल मीडिया पर काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी. हालांकि, जमीन पर यह कितना कामयाब हो सका, इसे मापा नहीं जा सका है.

ग्रामीण ने बताया कि सेल्फ-डिफेंस ग्रुप के कम-से-कम 11 सदस्य मारे गए हैं. उसे यह जानकारी गांव के अन्य लोगों ने दी है. इंटरनेट पर मारे गए लोगों की बॉडीज भी खूब शेयर की गई, जिसे उनके जानने वाले कई लोगों ने पहचाना भी. ग्रामणी ने कहा, ”हमारे पास केवल हाथों से बनीं बंदूकें ही हैं. लड़ाई के कुछ समय बाद बंदूकें खराब हो गईं. इसकी वजह से कई लोग हताहत भी हुए हैं.’

Share.

Comments are closed.