वाशिंगटन, 11 सितंबर अमेरिका ने अफगानिस्तान से शुक्रवार को अपने 21 नागरिकों और 11 ग्रीन कार्ड धारकों को सुरक्षित निकाला। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इसकी जानकारी दी।

उन्होंने एक बयान में कहा, ”हमारी प्रतिबद्धता के तौर पर आज हमने 21 अमेरिकी नागरिकों और 11 वैध स्थायी निवासियों को अफगानिस्तान से सुरक्षित निकाला।”

इसके अलावा कतर एयरवेज का एक अन्य चार्टर विमान काबुल से 19 अमेरिकी नागरिकों को लेकर रवाना हुआ। ब्लिंकन ने कहा, ”हमने 44 अमेरिकी नागरिकों को सीटों की पेशकश की थी लेकिन उनमें से सब ने यात्रा करने की इच्छा नहीं जतायी। हम काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर सीमित उड़ानों के संचालन और इन विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद के लिए कतर के निरंतर प्रयासों का दिल से आभार जताते हैं।”

अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जलमी खलीलजाद ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि पिछले तीन दिनों में कई अमेरिकी नागरिकों और स्थायी निवासियों समेत 250 से अधिक विदेशी नागरिक कतर के विमानों से बिना किसी बाधा के काबुल से रवाना हुए।

खलीलजाद ने कहा, ”यह सकारात्मक है। इन विमानों के संचालन में मदद के लिए कतर का धन्यवाद और हम इस महत्वपूर्ण प्रयास में तालिबान के सहयोग का स्वागत करते हैं। हम अपने नागरिकों, अन्य विदेशी नागरिकों और देश छोड़ने की इच्छा रखने वाले अफगान नागरिकों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए कतर की सरकार, तालिबान और अन्य के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।”

ब्लिंकन ने कतर के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी को फोन करके कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों, वैध स्थायी निवासियों और अन्य की काबुल से यात्रा में दी गई कतर की मदद की सराहना करता है।

व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की प्रवक्ता एमिली होर्न ने कहा, ”इस तरह के अभियानों पर आतंकवादी खतरे के कारण हम देश से लोगों को सुरक्षित निकाले जाने से पहले इन प्रयासों की जानकारियां साझा नहीं करेंगे। हम काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर अभियानों में मदद के लिए कतर के प्रयासों के प्रति आभारी हैं।”

उन्होंने कहा, ”आज लोगों का प्रस्थान करना यह दिखाता है कि हम कैसे अमेरिका को अलग-अलग स्थानों से अफगानिस्तान छोड़ने के स्पष्ट और सुरक्षित विकल्प दे रहे हैं। कई अमेरिकियों ने इन विकल्पों को स्वीकार किया, कुछ ने नहीं और इसकी कई वजहें हैं। वह उनका अधिकार है। हम समझते हैं कि ये मुश्किल फैसले हैं।

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