विश्वविद्यालय में भवन व प्रयोगशाला के विकास के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय अब अनुदान के बजाय बिना ब्याज के कर्ज देगा।

विश्वविद्यालय को निर्धारित समय सीमा में विकास में लगे पैसे को न केवल वापस करना पड़ेगा बल्कि रकम वापसी की गारंटी भी लेनी होगी।

यही नहीं विकास के लिए मांगी गई कुल रकम का 10 फीसद हिस्सा मंत्रालय की ओर से बनाई गई एजेंसी में जमा भी करना पड़ेगा। पहले चरण में यह व्यवस्था केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ही लागू होगी।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से इसके लिए बीते महीने फंडिंग के लिए हायर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी (हीफा) बनाई गई है। इसके तहत 10 साल से अधिक समय से चल रहे संस्थानों को अनुदानित कर्ज की श्रेणी में रखा जाएगा।

नई संस्थाओं के विकास के लिए अनुदान के रूप में कर्ज दिया जाएगा, लेकिन उन्हें मांगे गए कुल बजट का 25 फीसद रकम जमानत के तौर पर जमा करनी होगी। विश्वविद्यालयों को दो, तीन और पांच साल के अंदर रकम को चुकाना होगा।

निर्धारित समय सीमा में कर्ज चुका पाने में अक्षम संस्थाओं को भविष्य में कर्ज नहीं दिया जाएगा। यह नियम अभी केंद्रीय विवि और केंद्रीय मैनेजमेंट व तकनीकी संस्थाओं में लागू होगा।

इस आदेश का असर राजधानी के बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय में पड़ेगा। इसके साथ ही बीएचयू, अलीगढ़ मुस्लिम विवि, इलाहाबाद विवि,राजीव गांधी एविएशन विवि रायबरेली व रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विवि झांसी पर नया आदेश प्रभावित होगा।

इन नए नियम से विश्वविद्यालयों में भवन निर्माण में होने वाले भ्रष्टाचार पर जहां अंकुश लगेगा वहीं दूसरी ओर रकम वापसी के लिए विवि प्रशासन को फीस भी बढ़ानी होगी। फीस बढऩे से छात्रों पर भी प्रभाव पड़ेगा।

विश्वविद्यालयों के कुलपति अभी इस मामले में कुछ भी बालने से बच रहे हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हायर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी (हीफा) के माध्यम से पैसा देने का निर्णय लिया है। कर्ज के रूप में पैसे मिलने की वजह से विश्वविद्यालयों को मजबूरी में फीस बढ़ानी होगी।

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