काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के ऑडिटोरियम में वर्ल्ड फिजियोथैरेपी दिवस पर फिजियोथैरेपी ऑक्यूपेशनल थेरेपी सिंपोजियम का आयोजन किया गया।

वहीं बीएचयू में फिजियोथेरेपी में संचालित बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी के कोर्स का विस्तार किया जाएगा। इस कोर्स में प्रवेश परीक्षा से ही आगे भी प्रवेश लिया जाएगा। इस बात की जानकारी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईएमएस के निदेशक प्रो. बी. आर.मित्तल ने दी।

उन्होंने इस कोर्स के तहत पढ़ाई करने वाले छात्रों और पाठ्यक्रम की प्रशंसा की। इसके साथ ही महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के मूल्यों के अनुरूप ही इस कोर्स का संचालन करने की बात कही।

प्रो. मित्तल ने कहा कि हड्डी रोग हो या नर्व रोग, या खेल के दौरान लगने वाली चोटों से फिजियोथेरेपी छुटकारा दिलाता है। इसमें करियर बनाने की संभावना आगे आने वाले भविष्य काफी अच्छी रहेगी।

अस्थि रोग और सर्जरी के उपरांत मरीज को फिजियोथेरेपी ही उसे वापस बेहतर बना सकती है और उसे अपने कदमों पर चला सकती है। वहीं लिगामेंट इंजरी, फ्रैक्चर आदि की सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी की भूमिका सबसे अहम हो जाती है।

फिजियोथैरेपी ऑक्यूपेशनल थेरेपी सिंपोजियम कार्यक्रम में कला और विज्ञान के माध्यम से फिजियोथेरेपी की बढ़ती प्रासंगिकता पर 14 घंटे तक मंथन और नाटक का मंचन हुआ।

फिजियोथेरेपी के छात्रों ने नाटक, कविता, क्विज, सोलो गीत के माध्यम से समाज में व्याप्त अज्ञानता पर चोट किया। वहीं बीएचयू के भावी फिजियोथेरेपिस्ट की टीम ने पॉवर प्वाइंट पोस्टर प्रेजेंटेशन की एक प्रतिस्पर्धा भी आयोजित की।

विशिष्ट अतिथि फैकल्टी ऑफ मॉडर्न मेडिसिन के डीन प्रो. एस के सिंह ने कहा कि फिजियोथेरेपी के दायरे में तेजी से इजाफा हो रहा है। देश-विदेश में फिजियोथेरेपिस्ट की मांग बढ़ रही है।

ऐसे में यह आवश्यक है कि फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी के बेहतर से बेहतर विद्यार्थियों को बीएचयू में तैयार किया जाए। उनके अध्ययन-अध्यापन को सुचारु रूप से चलाने हरसंभव मदद की जाएगी।

ट्रॉमा सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह ने कहा कि ट्रॉमा सेंटर में भी फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी के छात्र-छात्राओं की क्लिनिकल पोस्टिंग की जानी आवश्यक है। इससे ट्रॉमा सेंटर के मरीजों को लाभ और इन छात्रों को बेहतर प्रशिक्षण की सुविधा मुहैया हो पाएगी।
पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में छात्रों ने अपना कमाल दिखाया, जिसमें पहला प्राइज फिजियोथेरेपी की छात्रा तेजस्विनी गुप्ता, पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन में शिखा श्रीवास्तव, एनाटॉमी क्विज कंपीटिशन में ऑक्यूपेशनल थेरेपी के रवि, श्रेया, विवेक और ज्योति की टीम ने जीत दर्ज की।

एकल प्रतियोगिता में ऑक्यूपेशनल थेरेपी की छात्रा आंकाक्षा गुप्ता को पहला प्राइज दिया गया। वहीं स्ट्रीट प्ले में सर्वश्रेष्ठ अभिनय का खिताब शशि रंजन कुमार और दूसरा प्राइज पुरस्कार पंकज कुमार यादव को मिला। वहीं इस प्ले में बेहतर लेखन के लिए प्रिया देवी को सम्मानित किया गया।
समापन सत्र में छात्र अधिष्ठाता प्रो. एम के सिंह ने कहा कि फिजियोथेरेपी यूनिट को विभाग के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए। इससे फिजियोथेरेपी की शिक्षा में दूर-दराज के छात्रों को बेहतर करियर बनाने का अवसर मिलेगा।

वहीं इस विज्ञान की मदद से हम लोगों को कई संभावित बीमारियों से भी मुक्त भी रख पाएंगे।

अंतिम सत्र में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित और कथक नृत्यांगना सोनी चौरसिया ने अपने साथ हुए कड़वे अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि बीएचयू न होता वे वह अपने लक्ष्यों को कभी नहीं पा सकता थीं।

नृत्य करते हुए एक बार इस तरह घायल हुईं कि डाक्टरों ने उन्हें यहां तक कह दिया था कि वह अब कभी उठ नहीं पाएंगी। लेकिन उस दौर में फिजियोथेरेपी ने उन्हें बल दिया और कुछ अभ्यासों के बल महज डेढ़ माह में चलने-फिरने लायक बन गईं।

बीएचयू में आर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. एस एस पांडेय ने दोबारा से कथक नृत्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। सोनी बताती हैं कि इसके बाद उन्होंने नृत्य की प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मानित भी हुईं।

कार्यक्रम में विषय की स्थापना करते हुए कार्यक्रम संयाेजक और अस्थि रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ एस एस पांडेय ने कहा कि फिजियोथेरेपी के विद्यार्थियों में काफी प्रतिभा है।

उन्हें विश्वविद्यालय के स्तर पर और निखारने की जरूरत है। हमारी मंशा यह है कि बीएचयू के इस फिजियोथेरेपी कोर्स को स्कूल ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी की स्थापना हो। इसके साथ ही देश-विदेश में बीएचयू को एक नई पहचान मिले।

कार्यक्रम में स्वागत भाषण कार्यक्रम सह संयोजक डॉ. व्योम ज्ञानपुरी ने और धन्यवाद ज्ञापन सह संयोजिका डॉ. जया दीक्षित ने दिया। इस दौरान इस सिंपोजियम में वाराणसी के सबसे वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अयोध्या प्रसाद, डॉ. मंडल और डॉ. आर के सिन्हा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में करीब 100 छात्र और छात्राएं मौजूद रही।

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