फिरोजाबाद और आसपास के इलाकों में फैला डेंगू का बुखार कैसे ‘संदिग्ध’ बना, इसके पीछे की वजह अलाइजा टेस्ट का न हो पाना है। शुरुआती दौर में जो मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचे उनका केवल रैपिड एंटीजेन टेस्ट हुआ।

जबकि डेंगू प्रोटोकॉल में साफ है कि जबतक अलाइजा टेस्ट में डेंगू की पुष्टि नहीं होगी तबतक उसे डेंगू का मरीज नहीं माना जाएगा। वहीं, जबतक मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल अलाइजा टेस्ट का इंतजाम करवा पातीं तबतक स्थितियां बिगड़ चुकी थीं और फिरोजाबाद के कई इलाकों में मौत होने लगी थी।

फिरोजाबाद में जानलेवा बुखार से मृतकों का आंकड़ा 111 हो गया है। बुधवार को 5 बच्चों समेत 8 लोगों की मौत हो गई। फिरोजाबाद, मथुरा, बलिया जैसे जिलों में परेशानी लगातार बढ़ रही है।

यहां अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जहां एक तरफ फिरोजाबाद के मेडिकल कॉलेज में 430 मरीज भर्ती हैं। वहीं मथुरा के कई गांवों में भी इसका प्रकोप और केस बढ़ते जा रहे हैं।

मथुरा में अब तक एक दर्जन से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। फिरोजाबाद में ही बुखार के 430 मरीज भर्ती हैं। वहीं अबतक 50 से ज्यादा की मौत की खबरें हैं। यूपी की इस रहस्यमयी बीमारी की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। राजधानी लखनऊ, एटा, इटावा, सीतापुर, बाराबंकी, श्रावस्ती, कासगंज और फर्रुखाबाद से मामले सामने आ रहे हैं।

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