हाल में मध्य प्रदेश की जो घटनाये सामने आयी है कई लोग उनकी तुलना कथित रूप से तालिबान से कर रहे है। उनका तर्क है किसी को दर्दनाक मौत देना और पीटकर हत्या कर देना कनून को मानना लोगो के दिलो में नफरत और डर पैदा करना तालिबानी संस्कृति से कम नहीं है।

6 अगस्त को नीमच के कन्हैया लाल को कुछ लोगों ने जमकर पीटा था। उसे एक चारपहिया गाड़ी के पीछे बांधकर कुछ दूर तक घसीटा था। इसके बाद कन्हैया लाल की मौत हो गई थी। लोगों की इस बर्बरता का वीडियो सोशल मीडिया में आग की तरह फैल गया था। मुख्य आरोपी सरपंच पति महेंद्र गुर्जर ने इस बर्बरता पूर्वक घटना को अंजाम दिया है। पूरे मामले में एसपी ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतक का क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है। यह बात अलग है लेकिन इस तरह की अमानवीय घटना करना कतई बर्दाश्त नहीं है।

उसके 1 सप्ताह बाद बिस्टान पुलिस ने गांव माखेरकुंडी निवासी 35 वर्षीय बिसन को चोरी व डकैती के आरोप में पकड़ा था। पुलिस हिरासत में कथित मारपीट से उसकी मौत हो गई। जब यह खबर गांव पहुंची तो लोग आक्रोशित हो गए और बड़ी संख्या में पुलिस थाने पर आ गए।

जहां लोगों ने आरोपित की मौत के विरोध में मंगलवार (07 सितम्बर 2021 ) को आदिवासी महिला-पुरुषों ने पुलिस थाने पर पथराव कर दिया और वाहनों को भी क्षतिग्रस्त किया। घटना में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। खरगोन से अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचा और लोगों को हटाया गया।

आदिवासी समाज का आरोप प्रशासन कथित जाति देखकर कार्यवाही करता है हमारे लोगो को भेंड़ बकरियों की तरह पीटा जाता है –

आदिवासी कन्हैया लाल हत्याकांड के बाद रविवार को आदिवासियों का सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें पूरे मध्यप्रदेश के आदिवासी लोग इकट्ठा हुए, आदिवासी समुदाय पुलिस की कार्यवाही से असंतुष्ट थे और उनकी मांग थी कन्हैया लाल भील के गरीब परिवार को एक करोड़ मुआवजा और परिवार के एक बच्चे को सरकारी नौकरी मिले।

मध्य प्रदेश में कन्हैया लाल भील को न्याय दिलाने के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति का जनाक्रोश (source Social media Twitter)

अब तक मध्य प्रदेश में यह अबसे बड़ी पंचायत थी जब किसी अनुसूचित जाति एवं जनजाति से जुड़े मुद्दों के लिए एकत्रित हुयी। इसके बाद बिस्टान पुलिस थाने में आदिवासी युवक की कथित पिटाई और हत्या इस भीड़ को और हिंसक बनाने का कार्य किया।

सब इंस्पेक्टर सहित चार पुलिसकर्मी सस्पेंड, वरिष्ठ न्यायाधीश करेंगे जांच

जिला एवं सत्र न्यायाधीश खरगोन द्वारा न्यायिक जांच के लिए एक वरिष्ठ न्यायाधीश की नियुक्ति की गई है। घटना में मृतक की मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच जारी है।

पुलिस अधीक्षक शैलेंद्रसिंह चौहान ने चार पुलिस कर्मियों को सस्पेंड किया है। जिसमें एक सब इंस्पेक्टर, एक हेड कांस्टेबल और दो कांस्टेबल शामिल हैं। मृतक परिवार को संबल योजना से तत्काल पांच हजार रुपये की अंत्येष्टि सहायता के अलावा रेडक्रास से कलेक्टर अनुग्रहा पी. ने 25 हजार रुपये और विधायक केदार डावर ने विधायक निधि से तत्काल 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। इसके अलावा राज्य शासन की संबल योजना से मृतक परिवार को 2 लाख रुपये की मदद की जाएगी।

क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के अनुसार 24 अगस्त की रात पाल मार्ग में झगड़ी घाट पर बदमाशों ने ट्रक और मोटरसाइकल सवारों से लूटपाट की थी। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर इस मामले में भगवानपुरा ब्लाक के खेरकुंडी निवासी 12 लोगों को गिरफ्तार किया था।

पूछताछ के बाद सभी को जेल भेज दिया गया। जेल में आरोपित 35 वर्षीय बिसन पुत्र हाबु की तबीयत खराब हो गई। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

जिसके बाद परिजनों ने आरोप लगाया की युवक की मौत कथित पुलिस पिटाई से हुयी है, हालाँकि सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें सामने आयी है वह चिंता जनक है व्यक्तिमृतक के शरीर पर काफी चोट है। जिसके बाद बाद मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुषों बिस्टान थाने पर हमला कर दिया .

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