गोरखपुर​ में बाढ़ और जलभराव की दुश्वारियों से अभी छुटकारा भी नहीं मिला कि शहरवासियों के सामने एक नई समस्या आकर खड़ी हो गई। बारिश और बाढ़ ने जिले के विकास की पोल-पट्टी खोल कर रख दी है।

शहर में एंट्री करने वाली सभी सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। अब होर्डिंग पर नहीं आम लोग सड़क पर खड़े होकर राहगीरों को नसीहत दे रहे हैं, ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।’

निर्माणाधीन गोरखपुर से वाराणसी मार्ग पर तो गड्ढे हैं हीं, 531 करोड़ से बने जिस फोरलेन को एक साल भी लोकार्पण को नहीं हुआ। वहां की सड़क भी धंस गई है। फोरलेन दरिया बना हुआ है।

गोरखपुर-लखनऊ मार्ग पर नौसढ़ के पास बुधवार की सुबह अचानक गड्ढा हो गया तो लोगों का जमावड़ा लग गया। हालांकि, लोक निर्माण विभाग का दावा है कि जल्द ही 70 करोड़ रुपए खर्च कर शहर को पूरी तरह से गड्ढा मुक्त किया जाएगा।

गोरखपुर-वाराणसी मार्ग पर गड्ढे ही गड्ढे

गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन पिछले चार साल से बन रहा है। मुख्यमंत्री से लेकर प्रमुख सचिव तक फोरलेन का निर्माण कर रही फर्म को फटकार चुके हैं, दर्जनों नोटिस दे चुके हैं। लेकिन कहीं कोई सुधार नहीं हो रहा है।

कौड़ीराम, बड़हलगंज, कसिहार में आसपास के लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने कार्यदायी फर्म को धीमी रफ्तार को लेकर नोटिस दिया है।
सपा नेता विश्वजीत त्रिपाठी कहते हैं कि अधिकारी से लेकर मंत्री सिर्फ नोटिस देकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। डीएम पहले ये बताएं कि पूर्व के नोटिस का क्या जवाब मिला है?

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