ग्रामीण अनुसूचित / जाति अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के केवल 4 प्रतिशत बच्चे नियमित रूप से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। सर्वेक्षण के दौरान जब पाठ पढ़ने के लिए बोला गया , तो वे कुछ अक्षरों से आगे नहीं पढ़ सके. सर्वेक्षण से पता चलता है कि 55 प्रतिशत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के बच्चे बिना स्मार्टफोन के रह रहे हैं, जबकि अन्य के लिए ये आंकड़ा 38 प्रतिशत है

ग्रामीण अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के माता-पिता में से 98 प्रतिशत चाहते थे कि स्कूल जल्द से जल्द फिर से खुल जाएं

इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अंक और योग्यता की ऑनलाइन दौड़ में भी दलित और आदिवासी परिवारों के बच्चे बहुत पीछे छूट गए.

जाति डिजिटल विभाजन में एक अलग बाधा है, रिपोर्ट में लातेहार जिले (झारखंड) के कुटमू गांव का मामला है, जहां अधिकांश परिवार दलितों और आदिवासियों के हैं. हालांकि, शिक्षक गांव के कुछ उच्च जाति के परिवारों में से एक है

सर्वे टीम से इन उच्च जाति परिवारों के कुछ सदस्यों ने खुले तौर पर पूछा, अगर ये (SC/ST) बच्चे शिक्षित हो जाएंगे, तो हमारे खेतों में कौन काम करेगा?

कुटमू में साक्षात्कार किए गए 20 अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के बच्चों में से कोई भी ठीक से पढ़ने में सक्षम नहीं था।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि पढ़ने और लिखने की क्षमता में भारी गिरावट के बावजूद, छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट किया गया है. आने वाले दिनों में स्कूली सिलेबस में बदलाव होने जरूरी हैं. क्योंकि लॉकडाउन ने बच्चों को काफी पीछे धकेल दिया है. जो बच्चा. कक्षा 3 में पढ़ता है, वो अब खुद को दो साल पीछे पाता है, लेकिन असल में वो अब 5वीं कक्षा का छात्र है जबकि आने वाले कुछ ही महीने में वो प्राइमरी स्कूल पास कर लेगा.ये भी पढ़ें

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