नई अनाजमंडी में हुई महापंचायत के बाद किसान संगठन से जुड़े आंदोलनकारी ने शाम को लघु सचिवालय को घेर लिया था। रात भर आंंदोलकारी डटे रहे।

सुबह से लंगर की भी व्‍यवस्‍था शुरू हो गई है। सुबह भी आंदोलनकारी बैठे हुए हैं। वहीं, राकेश टिकैत का कहना है कि हम यहां पर बैठे हैं, सरकार को बात करनी है तो यहां आकर कर ले। इस समय करनाल के हालात तनावपूर्ण हैं। 

बता दें कि महापंचायत में तीन कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों से जुड़े आंदोलनकारी नेता सरकार के खिलाफ जमकर बरसे।

कई घंटे तक चले हाई वोल्टेज घटनाक्रम में केंद्र और प्रदेश सरकार पर तीखे शब्दों में प्रहार किया गया।

इसी बीच चरम पर पहुंचे तनाव व बेहद संवेदनशील हालात के बीच जब प्रशासनिक अधिकारियों से तीन दौर की वार्ता बेनतीजा रही तो महापंचायत के मंच से जिला सचिवालय कूच का एलान कर दिया गया।

इसी के साथ हजारों की संख्या में आंदोलनकारियों का काफिला रास्ते के तमाम अवरोध पार करते हुए आखिरकार शाम करीब सवा छह बजे जिला सचिवालय के गेट पर पहुंच गया।

इस बीच पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का भी प्रयोग किया गया लेकिन आंदोलनकारी नहीं रुके। खास बात यह रही कि प्रशासन की ओर से राह में कहीं भी बल प्रयोग नहीं किया गया।

शाम करीब सात बजे भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत और भाकियू (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम चढ़ूनी की अगुवाई में आंदोलनकारी जिला सचिवालय के गेट के आगे ही बैठ गए।

बीते दिनों हुए बसताड़ा प्रकरण में लाठीचार्ज को लेकर लगातार आंदोलनकारियों के निशाने पर रहे करनाल के तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा पर सख्त कार्रवाई सहित अपनी अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को नई अनाज मंडी परिसर में किसान सुबह से ही जुटना शुरू हो गए थे।

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