फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए हैदराबाद भेजी गईं लोहिया संस्थान की रेजिडेंट डाक्टर शारदा सुमन का चार सितंबर को निधन हो गया। डाक्टरों के अनुसार उन्हें कोई डोनर नहीं मिल सका। इस दौरान उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई।

वह करीब चार महीने तक एक्मो मशीन पर जीवित रहीं। दुर्घटना में मृत या ब्रेन डेड व्यक्ति का फेफड़ा आमतौर पर प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होता है। ऐसे व्यक्ति के परिवारजन दूसरों के लिए उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों का दान करते हैं।

डा. शारदा सुमन को लोहिया संस्थान से 11 जुलाई को एयर एंबुलेंस से एयरलिफ्ट कराकर हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में प्रत्यारोपण के लिए भर्ती कराया गया था। दरअसल, कोविड की दूसरी लहर के दौरान इमरजेंसी ड्यूटी करते समय वह संक्रमण की चपेट में आ गई थीं।

14 अप्रैल को उन्हें लोहिया संस्थान के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस दौरान वह सात माह की गर्भवती भी थीं। इसके बाद उनकी प्री-मेच्योर डिलीवरी करानी पड़ी थी।

अत्यधिक संक्रमण हो जाने से डाक्टरों ने फेफड़ा प्रत्यारोपण की सलाह दी थी। इसमें एक करोड़ रुपये से अधिक का खर्च अनुमानित था।

बाद में सीएम योगी ने इलाज के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की राशि जारी की थी, मगर चार सितंबर को हैदराबाद में उनका निधन हो गया। उनके पति डा. अजय भी लोहिया संस्थान के मेडिसिन विभाग में चिकित्सक हैं। उन्होंने बताया कि डोनर न मिलने से शारदा हमेशा के लिए उनका साथ छोड़ गईं।

करीब 140 दिन तक वह वेंटिलेटर पर रहीं। उन्होंने 2018 में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर लोहिया संस्थान को ज्वाइन किया था। मई 2019 को उनकी शादी खलीलाबाद निवासी डा. अजय से हुई थी। अब दुधमुही बच्ची बिना मां के रह गई। इससे उसके लालन-पालन की मुश्किलें पैदा हो गई हैं।

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