पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक प्रतिनिधि सम्मेलन एवं कोरोना जागरूकता अभियान के तहत जन अधिकार पार्टी के कार्यक्रम में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी।

इस कार्यक्रम में जैसा नाम दिख रहा था प्रतिनिधि सम्मेलन एवं कोरोना जागरूकता अभियान तो इस कार्यक्रम में कोरोना से जागरूक के लिए फिलहाल तो कुछ बताया नहीं गया लेकिन हां दूसरी पार्टी के लोग यह जरूर कहते नजर आए कि यह इसलिए लिखवाया गया जिससे कार्यक्रम में प्रशासन की ओर से कोई दिक्कत न आये, वांकी तो बेतहाशा भीड़ और किसी के पास मास्क तक नहीं,
इस सब ही काफी है इस कोरोना जागरूकता कार्यक्रम के लिए।

हां इतना जरूर दिखा कि खूब लंबे चौड़े राजनीतिक भाषण जरूर सुनाए गए लेकिन कोरोना की एक भी जानकारी यहाँ नहीं दी गई।

कोंच में पुरानी श्रीकृपाल टॉकीज के पास मां काली लॉज पर आयोजित जन अधिकार पार्टी के
पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक प्रतिनिधि सम्मेलन एवं कोरोना जागरूकता अभियान में पधारे वतौर मुख्य अतिथि जन अधिकार पार्टी के मुखिया बाबूसिंह कुशवाहा ने इस सम्मेलन के माध्यम से दलित पिछड़े और अल्पसंख्यकों को एकजुट रहने की सीख दी। इस मौके पर बाबूसिंह ने सम्मेलन के मंच से बसपा सुप्रीमो मायावती को खूब खरी सुनाते हुए कहा कि दलित हितों के लिए बनी बहुजन समाज पार्टी ने कभी दलितों को भी बिना पैसे के टिकिट नहीं दिया। आज दलित विरादरी के ऐसे तमाम नेता हैं जिन्होंने घर मकान बेच कर टिकिट लिया और आज पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं।

उंन्होने कहा कि हमारे मोर्चा का मकसद समाज के उपेक्षित और वंचित लोगों को न्याय दिलाना है और यह तभी संभव है जब दलित पिछड़े और अल्पसंख्यक एकजुट होकर वोट करके मोर्चा प्रत्याशियों को जिता कर विधानसभा और लोकसभा में भेजें। इस मौके पर बाबू सिंह कुशवाहा ने सपा, बसपा और भाजपा पर तीखे हमले करते हुए इन्हें जनता का शोषण करने वाली पार्टियां बताया और इनको आने वाले चुनाव में सबक सिखाने की बात कही। आयोजित कार्यक्रम में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू सिंह का फूलमालाएं व पगड़ी पहनाकर एवं तलवार भेंट कर स्वागत किया। कार्यकर्ताओं ने जमकर जिंदाबाद के नारे भी लगाए। इस मौके पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ हजारों पार्टी समर्थक व लोग मौजूद रहे।

फिलहाल जन अधिकार पार्टी के पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक प्रतिनिधि सम्मेलन एवं कोरोना जागरूकता अभियान की हर जगह चर्चाएं ही रही हैं कि कार्यक्रम तो ठीक है हर पार्टी करती है लेकिन ये समझ नहीं आ रहा कि अगर इस कार्यक्रम का नाम पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक प्रतिनिधि सम्मेलन तो ठीक है लेकिन इसमें एवं कोरोना जागरूकता अभियान क्यों जोड़ा गया ? और अगर यह सब लिखा गया था तो फिर कोरोना जागरूकता के बारे में भी चर्चा होनी चाहिए थी,

जब चर्चा होनी चाहिए थी तो कम से कम जो कार्यक्रम प्रमुख हैं या जो उनके नेता हैं तो उन्हें भी मास्क लगाना चाहिए था और जब यह सब होना चाहिए था तो फिर सोशल डिस्टेंस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए था लेकिन जानकारों की मानें तो यह इसलिए किया गया कि यह राजनीतिक कार्यक्रम था और इस कार्यक्रम में कोरोना जागरूकता अभियान इसलिये लिखा गया ताकि किसी प्रकार की कोई बाधा उनके कार्यक्रम में प्रशासन की तरफ से न आये। फिलहाल प्रशासन को कोंच में इतने बड़े हुए कार्यक्रम पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है कि क्या इस कार्यक्रम की परमीशन ली गयी थी ? और अगर परमीशन ली गयी थी तो कैसे इतने लोग यहां जुटे। जानकर अभी कोरोना की तीसरी लहर की बात कर रहे हैं और यहां विना किसी सावधानी के इतना बड़ा कार्यक्रम निश्चित ही अपने आपमें एक बड़ा सवाल है।

वहीं इस मामले में विपक्षी पार्टियों का कहना है कि विवाह घर की सीसी टीबी फुटेज निकाल ली जाए तो पता चल जाएगा कि अंदर और विवाह घर के बाहर कितने लोगों की भीड़ थी।

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