पोरबंदर में मछली पकड़ने का सीजन शुरू हो गया है। डीजल के बढ़ते भावों से मछुआरों की हालत खराब हो गई है। डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण इस साल 500 बोट समुद्र में मछली पकड़ने नहीं जांएगी।

महंगाई बढ़ने से पिछले साल की तुलना में इस साल 1 लाख रुपए का खर्च बढ़ गया है। इस बार एक बोट की एक ट्रिप 4.50 लाख रुपए में पड़ेगी। मछुआरे कितनी मछली पकड़ेंगे, भाव क्या में बिकेगी और कितने रुपए मिलेंगे इसे लेकर उलझन में पड़ गए हैं।

कुछ मछुआरे खतरों को झेलते हुए समुद्र में मछली पकड़ने रवाना हो गए हैं। 1 सितंबर से मछली पकड़ने का सीजन शुरू हो जाता है। इस साल 600 नावें समुद्र में रवाना हुई हैं।

डीजल की कीमतें बढ़ने से इस साल एक बोट की एक ट्रिक 4.50 लाख रुपए में पड़ेगी। पिछले साल की तुलना में एक लाख रुपए अधिक खर्च होंगे। मछुआरे पिछले दो सालों से लॉकडाउन, खलासियों के गांव जाने और मंहगाई का संकट झेल रहे हैं।

पिछले साल डीजल का भाव 75 रुपए था, जो इस साल बढ़कर 94 हो गया है। एक मछुआरों को एक ट्रिप में 3 से 4 हजार लीटर डीजल की जरूरत होती है। इसके अलावा राशन, बर्ट, खलासी की तनख्वाह और अन्य खर्च समेत करीबन 4.50 लाख रुपए खर्च होते हैं।

एक ट्रिप में कितनी मछलियां पकड़ेंगे, कंपनियां क्या भाव देंगी यह भी तय नहीं है। मंहगाई के कारण इस साल 30 से 40 प्रतिशत यानी 500 बोट समुद्र में मछली पकड़ने नहीं जाएंगी।

इस साल राशन पर 12-13 हजार खर्च होंगे
इस साल राशन के भाव भी बढ़ गए हैं। पिछले साल एक ट्रिप में 8 हजार रुपए राशन पर खर्च होते थे। इस साल 12 से 13 हजार रुपए खर्च होंगे। मछुआरों को समुद्र में जाने से पहले डीजल और राशन के पैसे तुरंत चुकाने पड़ते हैं।

पोरबंदर में मछुआरों का मार्च से मई तक का वैट रिबेट बाकी है। सीजन शुरू होने से पहले रिबेट दे देना चाहिए ताकि नया सीजन शुरू होने से पहले मछुआरों के पास पैसे रहे।

इसके अलावा डीजल में डिस्काउंट की अभी घोषणा नहीं हुई है। डिस्काउंट मिलने से मछुआरों को कुछ राहत होगी। इससे मछुआरों को एक ट्रिप में 12 हजार से अधिक की बचत हो सकती है। मुकेशभाई पांजरी, अध्यक्ष, बोट एसोसिएशन, पोरबंदर

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