ज्यूडिशियल कमीशन ने बिकरू कांड की जांच में 132 पेज की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में 13 पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं। दोषियों में तत्कालीन डीआईजी अनंत देव भी शामिल हैं।

बता दें, पूर्व जस्टिस डॉ. बीएस चौहान की अध्यक्षता में यह न्यायिक आयोग बनाया गया था, जिसकी जांच में कई खुलासे हुए हैं। इससे पहले, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई थी कि पुलिस विभाग के कई अफसर विकास दुबे के साथ मिले हुए थे और पुलिस विभाग की लापरवाही का भी जिक्र किया था।

बिकरू कांड में इन्वेस्टिगेशन के लिए बनाए गए न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किया गया। रिपोर्ट में तत्कालीन डीआईजी अनंत देव, डीएसपी सूक्ष्म प्रकाश, करुणा शंकर राय, आरके चतुर्वेदी, पासपोर्ट नोडल अफसर अमित कुमार, हरेंद्र कुमार, सुंदरलाल, नंदलाल प्रताप, सुभाष चंद्र, प्रेम प्रकाश, रामप्रकाश और लक्ष्मी निवास को दोषी बताया गया है। अब न्यायिक आयोग ने दोषी पाए गए सभी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए रिकमंडेशन दिया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इन दोषी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने विकास दुबे पर सख्ती बरतने के जगह नरमी बरती थी। सभी दोषी विकास दुबे को सपोर्ट कर रहे थे।

वहीं, यह बात भी कंफर्म की गई कि विकास दुबे पर जितने भी केस दर्ज हुए थे, उनमें से 21 फाइलें नहीं मिल रही हैं . या तो यह पुलिस विभाग की लापरवाही है या उन्हें जानबूझ कर गायब किया गया है.

इन 21 फाइलों में से 11 फाइलें कानपुर देहात के शिवली थाने की हैं. 5 चौबेपुर थाने, 4 कल्याणपुर थाने और 1 फाइल बिल्हौर की है. लापता फाइलों में से एक फाइल विकास दुबे के पहले केस की भी है, जो 1991 में दर्ज किया गया था.

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