आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 कार्यरत IAS और एक रिटायर्ड IAS को जेल भेजने तथा मुख्य सचिव समेत चार IAS अधिकारियों को बरी करने का आदेश दिया है। इन सभी को अलग-अलग अवधि के लिए जेल भेजने का कोर्ट ने आदेश जारी किया है।

2017 में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। एसपीएस नेल्लोर जिले की एक किसान तल्लापका सावित्रम्मा ने राजस्व अधिकारियों पर बिना नोटिस और मुआवजा दिए जमीन का अधिग्रहण करने के आरोप लगाए थे।

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसकी तीन एकड़ जमीन नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ को दे दी गई है। 2016 में अधिकारियों ने उसे मुआवजा देने का वादा किया था लेकिन मुआवजा नहीं दिया गया।

10 फरवरी 2017 को हाईकोर्ट के जस्टिस ए. राजशेखर रेड्डी ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने राजस्व अधिकारियों को 3 माह के अंदर मुआवजा देने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी मुआवजा नहीं दिया गया।

इस पर सावित्रम्मा ने 2018 में हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी, जिस पर 2 सितंबर को कोर्ट का फैसला आया है। हाईकोर्ट ने जिन अधिकारियों को सजा सुनाई है, उनमें मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव रेवु मत्याला राजू, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव शमशेर सिंह रावत, नेल्लूर के कलेक्टर केवीएन चक्रधर बाबू, पूर्व कलेक्टर एम. शेषागिरी बाबू और रिटायर्ड अधिकारी मनमोहन सिंह शामिल हैं।

NDTV के मुताबिक, रावत और सिंह को एक-एक महीने के कारावास की सजा सुनाई गई है। जबकि अन्य के लिए दो-दो सप्ताह के कारावास का आदेश कोर्ट ने दिया है। इन सभी पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इनको 10 फरवरी 2017 के कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने का दोषी माना गया है। जिसमे CM के सचिव भी शामिल है.

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