कोरोना महामारी के डेढ़ साल (18 महीने) बाद देश में स्कूल खुलना शुरू हो चुके हैं। बच्चे, अभिभावक और शिक्षकों में इसे लेकर खुशी है लेकिन 12 राज्यों में स्कूल खुलने के बाद से बच्चों में कोरोना की संक्रमण दर भी बढ़ी है।

इनमें से छह राज्य ऐसे हैं जहां संक्रमित बच्चों की संख्या में एक फीसदी से भी अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी राज्यों को एक बार फिर सख्त कोविड नियमों का पालन करने के लिए निर्देश जारी किए हैं।

साथ ही स्कूलों की निगरानी के लिए जिला प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए सख्त कदम उठाने के लिए कहा गया है। हाल ही में स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालय ने मिलकर दिशा निर्देश (एसओपी) तैयार किए थे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार देश के कुछ राज्यों में स्कूल खोले करीब एक महीना बीत चुका है। इनमें पंजाब सबसे ऊपर है क्योंकि वहां सबसे पहले स्कूलों को शुरू किया गया। इसके बाद बिहार में बीते 15 अगस्त के बाद स्कूल शुरू हुए। इस बीच मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ इत्यादि राज्यों में भी बच्चे स्कूल जाने लगे हैं।

दो महीने की तुलना करने पर सामने आए आंकड़े
पिछले दो महीने की तुलना करने पर यह देखने को मिला है कि 17 वर्ष तक की आयु के बच्चों में कुछ स्थानों पर संक्रमण दर में इजाफा हुआ है। पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में यह बढ़ोतरी एक फीसदी से अधिक है।

जबकि महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों में संक्रमण दर कम भी हुई है। यहां स्कूल खोलने से फिलहाल कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी बुधवार से स्कूल शुरू हो चुके हैं। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि आगामी दिनों में स्कूलों को लेकर और निगरानी की जाएगी। 

बच्चों में कोरोना का खतरा है कम
दरअसल कोरोना का असर वयस्कों की भांति बच्चों को भी होता है। आगामी तीसरी लहर और बच्चों को लेकर कयास लगाए जा रहे थे लेकिन विशेषज्ञों ने इन्हें बेबुनियाद माना था। इनका कहना है कि मासूम बच्चों में कोरोना का खतरा कम है क्योंकि इनकी प्रतिरक्षा प्रणाली काफी मजबूत है।

इसलिए स्कूल खोले जाने की सलाह दी गई। वहीं मेदांता अस्पताल के प्रमुख डॉ. नरेश त्रेहान सहित कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को शुरू करने के मामले में फिलहाल इंतजार करना चाहिए क्योंकि अभी तक देश में बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण शुरू भी नहीं हुआ है।

जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहारिया का कहना है कि बच्चों में संक्रमण का खतरा काफी कम है। साथ ही संक्रमण दर और स्कूल के बीच संबंध निकालना अभी जल्दबाजी होगी। इसके लिए कुछ समय का इंतजार करना चाहिए तभी बेहतर परिणाम पता चल सकते हैं। 

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