उफनाई राप्ती लोगों को घर से बेघर कर रही है। सिद्धार्थनगर जिले में बिथरिया, पिकौरा अनुसूचित व चाई टोला में दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी भर गया है, जिससे लोग परिवार सहित स्कूल व अन्य ऊंचे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं।

घर में रखा सामान और राशन बर्बाद हो गया है, जिससे लोग दाने- दाने को मोहताज हो गए हैं। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ का कहर बढ़ता ही जा रहा है। सैकड़ों बीघे धान की रोपाई जलभराव से पहले ही डूबी थी। अब लोगों के घरों में पानी भरने से हालात बिगड़ने लगे हैं।

बाढ़ पीड़‍ितों के लिए खाने-पीने का कोई प्रबंध नहीं
बाढ़ पीड़‍ितों के लिए न तो कहीं शरणालय बने हैं, और न ही उनके खाने- पीने का कोई प्रबंध है। पिकौरा गांव के अनुसूचित व चाई टोला टापू के जैसी स्थिति है। दर्जनभर से अधिक घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है।

लोग घर छोड़कर बाहर शरण लेने को मजबूर हैं। अधिकतर रिश्तेदारों के यहां परिवार भेज चुके हैं कि कम से कम लोग सुरक्षित तो रहेंगे। पीड़‍ितों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से न तो राशन मिला है और न ही सुरक्षा के कोई बंदोबस्त हो रहे हैं।

एसडीएम त्रिभुवन ने कहा कि पीडि़तों तक हर प्रकार की मदद पहुंचाने के प्रयास निरंतर जारी है। सुक्खू ने कहा कि आज तक सिर्फ बाढ़ से बचाव के लिए आश्वासन ही मिला, कोई इंतजाम नहीं हुआ जिससे हालात बिगड़ रहे हैं।

अभी तक नहीं मिल सका राशन
रीता ने कहा कि बाढ़ पीडि़तों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं है। अभी तक राशन तक नहीं मिल रहा कि भूख मिट सके। वहीं श्यामा ने कहा कि घर का सारा सामान पानी भरने से बर्बाद हो गया।

राशन कपड़े जरूरी दस्तावेज बह गए। फूलमती ने कहा कि साल दर साल तबाही बढ़ती जा रही है। सरकार कोई भी हो सुरक्षा और सहायता देने में पीछे ही रही।

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