अक्सर ऐसा कहते लोगो को सुना जाता है कि यह एक तालिबानी कृत्य है। खासकर जब किसी व्यक्ति, समुदाय पर बर्बरता होती है जिसे हमारा समाज और संविधान स्वीकार नहीं करता है उसकी तुलना तालिबानी विचारधारा से किया जाता है।

तालिबान का नाम लेते ही आपके दीमाक में जो तस्वीर बनती है वह काफी हिंसात्मक, कट्टरता और आत्मघाती होते है। यह एक भीड़ का रूप है जिसे कुछ भी कराया जा सकता है।

हाल के दिनों में इस शब्द का प्रयोग भारत में तेजी से बढ़ता जा रहा है। किसानों पर हुए लाठीचार्ज की संजय राउत ने तालिबानी सोच से की तुलना, बोले- यह देश के लिए शर्मनाक घटना। वंही मध्य प्रदेश में आदिवासियों और मुस्लिमो के साथ कथित हिन्दू संगठनों द्वारा की गयी हिंसा को कांग्रेस सहित कई लोगों ने तालिबानी संस्कृत का उदय बताया है।

दरअसल धर्म के नाम पर भारत में हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही है। आये दिन मॉब लिंचिंग, भीड़ हिंसा, धर्म के नाम पर किसी को प्रताड़ित करना, कानून हाँथ में लेने की तो मानों परम्परा सी बन गई है।

अगर इन घटनाओं को देखे तो एक बार कहा भी जा सकता है इनके लिए न तो हमारा संविधान कहता है, नहीं हमारा सामाजिक ताना-बाना जब अभी इन संगठनों के कार्यकर्ताओं पर कार्यवाही की बात होती है कोई न कोई राजनैतिक पार्टी इनके बचाव में सामने उत्तर आती है।जिसके बाद अब सवाल उठता है भारत जैसे देश में ऐसी विचारधारा को रोकने के लिए कौन सामने आएगा।

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