17 महीने यानी करीब डेढ़ साल का वक्त बीत चुका है जबसे भारत में छोटे बच्चे स्कूल नहीं गए हैं भारत उन कुछ देशों में से है जहां कोविड महामारी से बचाव के लिए लगे लॉकडाउन और पाबंदियों की वजह से छोटे बच्चे लगातार घर पर ही रहे हैं।

युनीसेफ का आकलन है कि इससे भारत में प्राइमेरी और सेकेंड्री स्कूल जानेवाले करीब 25 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं इनमें से कई स्मार्टफोन, इंटरनेट और टीवी ना होने की वजह से बिना पढ़े ही अगली क्लास में प्रमोट कर दिए गए।

ग्रामीण क्षेत्रों पर जहां छोटे बच्चों की शिक्षा इंटरनेट के अभाव में स्मार्टफोन के अभाव में या ऑनलाइन क्लासेस के अभाव में पटरी से उतर गई ऐसे में संजीव कुमार यादव जोकि सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय शुक्लापुर शिक्षा क्षेत्र रुदौली जनपद अयोध्या में कार्यरत हैं जो गांव खेलौनी , पूरेस्वयंबर,बदूलपुर , फिरोजपुर मखदूमि आदि में जाकर मोहल्ला क्लास चलाकर छात्रों को पढ़ा रहे है साथ ही अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

महिला शिक्षा पर दे रहे बल
सहायक अध्यापक संजीव कुमार यादव ने The netizen news से बात करते हुए बताया की वो अपने शिक्षा क्षेत्र में जिन बालिकाओं की शिक्षा रोक दी गई है या किसी कारण के चलते छूट गई है ऐसे में वे घर घर जा कर बालिकाओं के साथ साथ अभिभावकों को भी शिक्षा का महत्त्व समझा रहे है तथा पुनः शिक्षा शुरू करने का आग्रह कर रहे है।

बालिकाओं की शिक्षा का महत्व बताते हुए

कोरोना संक्रमण तथा वैक्सीन के प्रति लोगों को कर रहे हैं जागरूक
संजीव अपने शिक्षा क्षेत्र में गांव-गांव घूमकर ग्रामीण लोगों में कोरोना संक्रमण से बचाव वह कोरोना वैक्सीन के प्रति ग्रामीणों को जागरूक भी कर रहे हैं।

कोरोना संक्रमण तथा वैक्सीन के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए

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