महोबा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बदहाल है बता दें कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के बाद शिशु की हालत बिगड़ने पर महिला जिला अस्पताल भेजा गया जहां सुधारना होने पर डाक्टरों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया!
हालांकि परिजन करीब 3 घंटे तक एंबुलेंस के खातिर फोन लगाते रहे लेकिन एंबुलेंस नहीं आई और नवजात की मौत हो गई !

एंबुलेंस सेवा के अभाव में नवजात की मौत होने से परिवार में गम और आक्रोश जैसा माहौल दिखाई दिया सरकार के तमाम दावों के बीच जीवनदायिनी 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाली के चलते नवजात को अपनी जान गंवानी पड़ी!

दरअसल पूरा मामला चरखारी क्षेत्र के बेहारी गांव का है जहां के निवासी चेतराम की पत्नी अर्चना को प्रसव पीड़ा होने के कारण उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरखारी में भर्ती कराया गया जहां बच्ची के पैदा होने पर बेहतर इलाज के लिए महोबा महोबा महिला जिला अस्पताल में रेफर कर दिया गया!

लेकिन वहां नवजात की तबीयत में सुधार न होता देख महिला अस्पताल के चिकित्सकों के द्वारा हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया जहां जीवनदायिनी 108 एंबुलेंस सेवा की मदद को लेकर प्रसूता के परिजन एंबुलेंस सेवा के खातिर बार-बार फोन लगाते रहे लेकिन 108 एंबुलेंस सेवा को फोन करने के बावजूद भी 3 घंटे तक नहीं पहुंची!

आखिरकार नवजात मासूम के इलाज के अभाव में मौत हो गई एंबुलेंस सेवा के अभाव में नवजात की मौत और गम का माहौल भी है उनका कहना है यदि उन्हें समय रहते एंबुलेंस की सुविधा मिल जाती तो शायद उनकी बच्ची की जान बच जाती !
“आखिर सरकार के यह कैसे दावे”

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