गाजियाबाद में 31 अगस्त के बाद जिले के सरकारी अस्पतालों में दिल का इलाज बंद हो जाएगा। क्योंकि एमएमजी अस्पताल में कार्य एकमात्र हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुनील कात्याल 31 अगस्त को सेवानिवृत हो जाएंगे अभी तक शासन ने दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इसलिए संबंधित बीमारी के लिए मरीजों का इलाज के लिए बाहर जाना पड़ेगा जबकि मेडिकोलीगल व् बंदी मेरठ या दिल्ली रेफेर होंगे।

10 साल बाद भी नहीं चालू हुआ बार्न वार्ड

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सरकार कितना सचेत है इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं। बर्न वार्ड बनने के 10 साल बाद भी अभी तक सक्रिय नहीं हो पाया है। क्योंकि वार्ड तो बना दिया गया है लेकिन अभी तक एक स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पाई है। अब बर्न वार्ड के सामने एक हजार एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा रहा है।

5 साल पहले बनाया गया आईसीयू वार्ड भी अभी तक शुरू नहीं हो पाया

इसी तरह पांच वर्ष पहले शुरू हुए ICU वार्ड अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। महामारी में स्वाथ्य व्यवस्था का दावा करने वाली सरकार केवल कागजों पर ही दम भर रही है हकीकत में कुछ नहीं है।

सीएमएस डॉ अनुराग भार्गव का कहना है कि शासन और सीएमओ को पत्र लिखकर निर्देश रोग विशेषक की नियुक्ति करने की मांग की गई लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

36 स्वास्थ्य केंद्र बदहाल

जिले में 76 उप केंद्रों को अपग्रेड किया जाना था लेकिन अब तक केवल 42 उप केंद्र ही सक्रिय हो सके हैं। उप केंद्र स्टाफ और संसाधनों की कमी के चलते अपडेट नहीं हो सके हैं।

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