राज्य सचिवालय नवान्न में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति परिषद की पहली बैठक के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने समुदाय के लोगों के लिए आगामी पांच सालों में 20 लाख घर बनाने की घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए विभिन्न परियोजनाएं शुरू की हैं। इन परियोजनाओं से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को लाभ मिल रहा है।


ममता बनर्जी ने कहा कि अनुसूचित जातियों के लिए 1.5 करोड़ रुपये की लागत से 260 मानसा थान विकसित किए गए हैं। परम पूजा और हल दिवस पर अवकाश घोषित किया गया है।

पंडित रघुनाथ मुर्मू, हरिचंद ठाकुर, पंचानन बर्मा और बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर अवकाश घोषित किया गया है। डॉ बीआर अंबेडकर के नाम पर एक तकनीकी संस्थान बन रहा है। विश्वविद्यालय,
छात्रावास के जीर्णोद्धार, पेयजल व्यवस्था, सड़क सहित अनुसूचित क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्य पहले ही किए जा चुके हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा, रिक्त पदों पर 10 हजार 241 लोगों को अनुसूचित सरकारी नौकरी मिली है। अनुसूचित जाति के श्रमिकों की संख्या बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई है। 2011 की तुलना में जो काफी बढ़ गया है।


उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए कम ब्याज ऋण का भी उल्लेख किया। ममता ने यह भी कहा कि राज्य में अनुसूचित जाति का बजट भी काफी बढ़ा है। 40 हजार से अधिक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को हजार रुपये की पेंशन दी जा रही है।

दस साल में करीब 12 लाख लोगों को जमीन के पट्टे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति परिवारों को लक्ष्मी भंडार परियोजना का अवसर मिलेगा। सरकारी परियोजनाओं में 10.69 लाख अनुसूचित लोगों को मकान दिए गए हैं। अगले तीन वर्षों में अनुसूचित गरीबों के लिए 100 अंग्रेजी माध्यम स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं।

पांच साल में अलचिकी भाषा में 65 और स्कूल होंगे। डेढ़ हजार पारा शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। और भी कई स्कूल होंगे। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए पांच साल में 20 लाख नए मकान बनाए जाएंगे। मौजूदा मिट्टी के मकानों का जीर्णोद्धार किया जाएगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के पिछड़े वर्गों को सुधारने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उनके लिए विभिन्न कार्य किए गए हैं।

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