देश में वैश्यों की कुल संख्या 01 % है जिनमे से चंद व्यवसायियों को सरकार देश की पूर्ण सम्पति , चिकित्सा, शिक्षा, परिवहन, संचार सहित सब कुछ बेंचना चाहती है। इससे इन सरकारी कंपनियों और संस्थाओं में चंद लोगो का नियंत्रण होगा जिसके बाद जैसे चाहे वैसे देश को नचायेंगे।

श्रीकुमार बताते हैं, लोगों ने चुनावी घोषणा पत्र पढ़कर भाजपा पर ‘भरोसा’ किया था। उसमें तो कहीं नहीं लिखा है कि सब कुछ प्राइवेट कर देंगे। रोजगार टूटेगा तो क्राइम बढ़ेगा। ओबीसी संशोधन बिल का पास होना और जातिगत जनगणना की मांग, इनके द्वारा किसे ‘आरक्षण’ मिलेगा, जब सरकारी क्षेत्र के विभाग या कारखाने ही नहीं बचेंगे।

खासतौर पर, स्थायी रोजगार तो बिल्कुल ही नहीं बचेगा। कॉन्ट्रैक्ट की नौकरी होगी तो सुरक्षा एवं दूसरे लाभ समाप्त हो जाएंगे। जो न्यूनतम वेतन होता है, वह भी नहीं मिलेगा। ट्रेड यूनियन के अधिकार खत्म होंगे। आरक्षण, वो चाहे सामाजिक हो या आर्थिक, उसका फायदा किसे मिलेगा। जब सरकारी विभाग ही नहीं रहेंगे तो आरक्षण कहां से देंगे। प्राइवेट क्षेत्र में तो आरक्षण है नहीं

बतौर श्रीकुमार, पिछड़े वर्ग और सामान्य वर्ग या आरक्षण की दूसरी श्रेणी में शामिल युवाओं का भविष्य खराब होने जा रहा है। सरकार, वोट बैंक के लिए आरक्षण का झुनझुना थमा देती है।

आर्थिक आधार पर दस फीसदी आरक्षण कितने लोगों को मिल सका है, सरकार लिस्ट जारी कर दे। इससे सरकार के वादों और दावों की सच्चाई तुरंत पता चल जाएगी। इस तह समानता के मिले सभी अधिकार खत्म हो जायेंगे और एक आर्थिक तानाशाही का उदय होगा।

यह भाजपा सरकार की नीति है पहले सरकारी कोष से मित्र व्यवसयियों का कर्ज माफ़ किया फिर उन्हें सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी देकर मालामाल किया कर अब वे उन्ही सरकारी संस्थानों और कंपनियों को खरीद रहे है।

पिछले पांच सालों से केंद्र सरकार ने अनेक विभागों में नौकरी देना बंद कर दिया है। महकमे बंद किए जा रहे हैं और कर्मियों को इधर उधर एडजस्ट कर देते हैं।

रक्षा क्षेत्र की कंपनियां लाभ में चल रही हैं, लेकिन सरकार उन्हें बेचने की तैयारी कर रही है। जबरन निजीकरण किया जा रहा है। श्रीकुमार के अनुसार, जब युवाओं को नौकरी नहीं मिलेगी तो वे अपराध के रास्ते पर चलेंगे।

सरकार, ऐसे दिन क्यों दिखाना चाहती है। नए प्रोजेक्ट ला नहीं रही है और पुरानों को धड़ाधड़ बेच रही है। क्या जनता ने इसीलिए भारी बहुमत दिया था। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कहीं नहीं लिखा था कि हम सब कुछ प्राइवेट कर देंगे। ये तो करोड़ों वोटरों के साथ धोखा है।

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, 1.6 लाख करोड़ रुपये का गिफ्ट यानी 26 हजार 700 किलोमीटर नेशनल हाईवे प्राइवेट हाथों में जा रहे हैं।

रेलवे, जो इस देश की रीढ़ की हड्डी है, जिसके बिना गरीब लोग एक शहर से दूसरे शहर में नहीं जा सकते। डेढ़ लाख करोड़ रुपये वाले रेलवे के 400 स्टेशन, 150 ट्रेनें, रेलवे ट्रैक और वुडशेड्स किसी प्राइवेट एंटिटी को दे दिए जाएंगे।

पावर ट्रांसमिशन क्षेत्र में 42,300 सर्किट किलोमीटर ऑफ ट्रांसमिशन नेटवर्क, पावर जनरेशन 6,000 मेगावॉट, हाइड्रो सोलर विंड एसेट, नेशनल गैस पाइप लाइन 8,000 किलोमीटर, ये सब किसके पास जा रहा है।

पेट्रोलियम पाइप लाइन, 4,000 किलोमीटर, 2.86 लाख किलोमीटर भारत नेटफाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, बीएसएनएल व एमटीएनएल के टावर और 29,000 करोड़ रुपये की वेयर हाउसिंग प्रणाली के 210 लाख मैट्रिक टन फूड ग्रेन स्टोरेज, यह सब बिक रहा है।

माइनिंग, 160 कोल माइंस के 761 मिनरल ब्लॉक, 21,000 करोड़ रुपये के 25 एयरपोर्ट, किसके पास जा रहे हैं। 13,000 करोड़ रुपये के 9 पोर्ट, जिसमें 31 प्रोजेक्ट हैं, वे किसे दिए जा रहे हैं।

11,000 करोड़ रुपये के दो नेशनल स्टेडियम भी प्राइवेट लोगों को सौंपे जा रहे हैं। देश के युवा अच्छी तरह जान लें कि जैसे-जैसे ये एकाधिकार बनते जाएंगे, वैसे ही उतनी रेट से रोजगार मिलना बंद हो जाएगा।

आप स्कूल में हों, कॉलेज में हों, इस देश में जो छोटे बिजनेस होते हैं, मिडिल साइज बिजनेस होते हैं, जो कल को आपको रोजगार देंगे, वो सब बंद हो जाएंगे, खत्म हो जाएंगे।

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